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Monday 20 Nov 2017

वह शख्स

अनुपमा श्रीवास्तव अनुश्री
भोपाल (म.प्र)
मो. 9893537438
वह शख्स
खुशियों की ओर छलांग लगाता वह शख्स
पीछे छोड़ जाता है, उन वादों-इरादों को
जो  किये खुद से या कभी किसी से
उन बुनियादों को जिनसे,
बुना था उसका अस्तित्व

मृग मरीचका सी खुशियाँ
दूर से चमकती रहीं लेकिन
वक्त का पहिया, किंचित न ठहरा
नित नयी इबारत गढ़ता रहा

चाहतों-महत्वाकांक्षाओं की तितलियाँ
मंडराती रहीं इर्द-गिर्द
उँगलियों पर रंग छोड़,
भरमाती, उड़ी जाती रहीं

आभासी खुशियों की टेक ऑफ  फ्लाइट में
सफर करता वह शख्स
 असली जमी पर लैंडिंग से घबराता सा
अपने ही बने जालों में उलझता
फिर भी सपने बुनता वह शख्स