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Wednesday 22 Nov 2017

कभी गौर से देखो तो

हरे प्रकाश उपाध्याय
204, सनशाइन अपार्टमेंटए बी-3. बी-4 कृष्णा नगर,
लखनऊ - 226023
मो .8756219902
कभी गौर से देखो तो
यह एक दिलचस्प कोलाज है
जिसमें एक खूँटी पर आतंकवादी बंदूक टंगी हुई है
जिसकी छाया पूरे देश भर में पसरती जा रही है
 पसरती ही जा रही है
नीचे एक घड़ी बेहाल पड़ी है
ऊपर एक गाँधी टोपी टंगी है
चूहों ने उसे बेतरह कुतर डाला है
एक कोने से लाठी ठकठकाते हुए
भगवा निक्कर पहने कुछ जांबाज अपनी काली टोपी काँख में दबाये हुए
चले जा रहे हैं चले जा रहे हैं
वे पूरे परिदृश्य को छेंक लेना चाहते हैं
जगह-जगह टीलों पर सेठ-साहूकार बैठे हुए हैं तराजू लिए हुए
वे पृथ्वी तौल रहे हैं
उनकी तिजोरियों की रक्षा में
या क्या जाने क्यों उनके इर्द-गिर्द कुछ लोमडिय़ाँ तैनात हैं
कुछ भालू टाई लगाये हुए अंडरशर्टिंग किये हुए एक बुलडोजऱ पर सवार हैं
जो फसलों को रौंदता हुआ आदिवासी झोपडिय़ों को गिराता हुआ
बढ़ा जा रहा है बढ़ा जा रहा है
किसान डरे हुए हैं सहमे हुए हैं
बिजूके मुआवज़ा थामे हुए हैं
ढहा आ रहा है आकाश