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Monday 22 Oct 2018

‘अक्षर ‘अक्षर पर्व’ का अक्टूबर 2016 अंक अपनी पूर्ण साज-सज्जा और स्तरीय सामग्री के साथ प्राप्त हुआ।

डॉ. ओमप्रकाश सिंह, 259, शांति निकेतन, साकेत नगर, लालगंज रायबरेली-229001 (उ.प्र.) मो. 09984412970

‘अक्षर पर्व’ का अक्टूबर 2016 अंक अपनी पूर्ण साज-सज्जा और स्तरीय सामग्री के साथ प्राप्त हुआ। ‘हिन्दी दिवस’ पर केन्द्रित संपादकीय मुझे पढऩे में रुचिकर लगी। खासकर आपका यह कथन कि ‘हिन्दी को लेकर अधिकतर बातें वे ही हैं जो हम पिछले साठ सालों से दोहराते चले आ रहे हैं।’ गांव तक जन्मे अंग्रेजी स्कूलों ने नई पीढ़ी को हिन्दी की धरती से विलग करने के लिए अनेक नई चालें चल रही हैं। बच्चों में हिन्दी पढऩे के प्रति रुझान भी कम होता जा रहा है। सरकारें और प्रबुद्ध जन अपने वैभव की मादकता में अपनी भाषा-संस्कृति को भूले हुए हैं। इसीलिए राष्ट्रीयता पद-दलित हो रही है। इस विशिष्ट चिंतन की प्रेरणा देने के लिए आपको बधाई।
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