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Tuesday 16 Oct 2018

अक्टूबर अंक की प्रस्तावना में हिंदी दिवस पर होने वाले औपचारिक आयोजनों के बदले कुछ सार्थक आयोजन हों,

शिवकुमार अर्चन, भोपाल, मप्र, मो.9425371874

अक्टूबर अंक की प्रस्तावना में हिंदी दिवस पर होने वाले औपचारिक आयोजनों के बदले कुछ सार्थक आयोजन हों, जिससे हिन्दी का महत्व लोगों की समझ में आए और उसका प्रचार-प्रसार हो, ललित जी के इन सुझावों का मैं समर्थन करता हूं। अंक में गोरेलाल चंदेल का आलेख समुद्र मंथन के बहाने शोधपरक और सारगर्भित है। आधुनिक संदर्भों में अमृत मंथन की व्याख्या एक कटु सत्य से हमारा साक्षात्कार कराती है। डा.सेवाराम त्रिपाठी का आलेख मैथिलीशरण गुप्त की रचनात्मकता को सही परिप्रेक्ष्य में देखने समझने की मांग करता है। स्तरीय अंक के लिए साधुवाद।