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Saturday 18 Nov 2017

सब खैरियत है

मार्टिन जॉन
‘‘हैलो, कौन?... शमीम हो क्या?’’
‘‘हां, हां, मैं शमीम ही हूं... बहुत दिनों बाद याद किया... कहो कैसे हो?... सब खैरियत है न जोसफ?’’
‘‘हां, सब खैरियत है... बस जरा इधर मिसेज की तबीयत बिगड़ी हुई है... ब्लड प्रेशर हो गया है न... रेगुलर चेकअप चल रहा है। ... दवाइयां ले रही है.. बाकी सब ठीक है।’’
‘‘और बच्चे?’’
‘‘ठीक ही हैं। बडक़ा जरा ढीला ढाला हो गया है... हमेशा छींकता-छांकता रहता है... चेकअप करवाया तो पता चला स्नोफेलिया का सिंपटम है। बाकी सब ठीक है।’’
‘‘और मां कैसी है?... उन्हें मेरा आदाब कहना।’’
‘‘मां बिस्तर पर लेटी है... महीनेभर पहले आंगन में गिर गई थी। कमर और कंधे पर चोट लगी है... डॉक्टर कहता है कमर की हड्डी खिसक गई है... बिस्तर पर ही आराम करने की सलाह दी है... मिसेज सेवा-टहल में लगी रहती है...। वैसे सब ठीक है!’’
‘‘और तुम कैसे हो?’’ कैसी चल रही है तुम्हारी नौकरी?.. ‘‘प्रमोशन मिला कि नहीं?’’
‘‘मैं भला चंगा हूं यार... अरे हां, तुम्हें बताना भूल गया कि मुझे डिकैटगराइज करके पचास किलोमीटर दूर एक छोटे से रेलवे स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया है... नेगलेजेंसी ऑफ ड्यूटी का एलिगेशन है... बस ऐसी ही चल रही है नौकरी... भोर चार को निकलता हूं। रात दस बजे वापस आता हूं।’’
‘‘ओह हो, ये तो यार बुरी खबर है। फिक्र न करो... अच्छे बुरे दिन तो •िांदगी में लगे रहते हैं... गॉड पर भरोसा रखो, सब ठीक हो जाएगा।’’
‘‘केवल मेरी ही सुने जा रहो शमीम... तुम कैसे हो? ... सब ठीक है न?... कैसा चल रहा है तुम्हारा बिजनेस?’’ ‘‘ठीक हूं यार।... इधर जरा हिसाब-किताब गड़बड़ा गया है... बैंक से लोन लिया था न!... छोटी बहन की शादी करनी थी।’’
‘‘अरे छोटकी की शादी हो गई?... कैसा है हमारा दामाद?... मजे में है न ससुराल में?’’
 ‘‘शायरा मेरे पास ही है। उसका दुल्हा एक हादसे में खुदा को प्यारा हो गया।’’
‘‘ओह नो, वैरी सैड। और अब्बा कैसे हैं? उनकी शेरो-शायरी चल रही है कि नहीं?’’
 ‘‘अच्छे हैं। आजकल बहुत ज्य़ादा खामोश रहते हैं। खामोश निगाहों से शायरा को तकते रहते हैं। उनके अंदर जो चल रहा है, किसी को बताते नहीं हैं।’’
‘‘और उनका लिखना-पढऩा?’’
 ‘‘हाथों में $िकताब लेकर सोचते रहते हैं। रात को उन्हें नींद नहीं आती इधर कई दिनों से गल के एक मुखड़े पर ही टिके हुए हैं। उसके आगे वह बढ़ नहीं पा रहे हैं...’’
‘‘अच्छा, क्या है वह मुखड़ा?’’ ‘‘जरा याद करने दो... हां, याद आया,’  किसी को किसी से गम नहीं, किसी का $गम किसी से कम नहीं।’’ अचानक नेटवर्क डिस्बर्ट हो गया। अजीब तरह की आवा के बीच बस इतना ही सुनाई पड़ा, ‘‘वैसे, सब खैरियत है।’’...
अपर बेनियासोल, पो.- आद्रा
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