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Monday 20 Nov 2017

मैं शिव नहीं हूं


डॉ. साधना कसार
पंचशील क्लब के पीछे
पंचशील नगर,
महासमुंद-493445

बासंती बयार का स्वागत करता
सुंदरता को पल-पल तकता
ये मन,
रुक क्यों गया
झुक क्यों गया
सामने खड़े गरीब बालक
मां की राह देखते खड़े ऐसे
जैसे बसंत की राह देखती मैं।

चेहरे की उदासी पर
मुस्कान की धूल पोते
खड़े वे
और देखती मैं
पेट-पीठ से चिपका
फटे कपड़े
आंसू का कतरा टपका
मां आएगी तो मिटाएगी भूख
तभी तो आएगा उनका बसंत।

और उनके बसंत की प्रतीक्षा में
मेरा बसंत कब चला जाता है

पता ही नहीं लगता।
उदास चेहरा, उदास मन,
निराश हो, नम आंखें लिए
द्वार बंद कर लौट आती हूं मैं
नहीं पी सकती उनका अश्रु-विष
क्योंकि

मैं शिव नहीं हंू।