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Thursday 23 Nov 2017

अक्षर पर्व बिना रुके मिल रहा है। मेरा अक्षर ज्ञान बढ़ता है अत: भाषा का भी,

गिरीशचंद्र चौधरी
भारतेन्दु भवन
चौखम्भा, वाराणसी-221001
फोन- 0542-2420257
अक्षर पर्व बिना रुके मिल रहा है। मेरा अक्षर ज्ञान बढ़ता है अत: भाषा का भी, यद्यपि भाषा में संवाद की महत्ता द्वारा डॉ. सुनील केशव देवधर ने भारतेन्दु के कवित्त के माध्यम से बताई है जो शतश: सत्य है। भारतेन्दु का यह कवित्त उजागर आपने कराया, अपने प्रकाशन में बहुत अच्छा लगा। पूर्वज भारतेन्दु कभी केवल हिन्दी को ही लेकर महत्व नहीं बताते अपितु भाषा का उदार स्वरूप उजागर करते थे। मेरे विचार से यह अनुकरणीय है। आज भाषा के प्रश्न पर युद्धोन्मत्त लोगों को ध्यान देना चाहिए।
जुलाई अंक में प्रेमचंद एवं दलित जीवन के विषय में डॉ. पंकज साहा का लेख सूचनापूर्ण एवं विश्लेषणयुक्त है। तदर्थ बधाई। मार्टिन जॉन की कहानी ‘घर’ बहुत सार्थक लगी। इस अपने बाह्य आडंबर के पीछे निजी सत्यता को भूल जाते हैं यह प्रशंसनीय एवं गाह्य अभिव्यक्ति है। कुल मिलाकर अंक रोचक एवं ज्ञानवर्धक है।
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