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Thursday 17 Oct 2019

इंतजार कर रहे थे

सीताकांत महापात्र अनुवाद- डॉ.राजेन्द्र प्रसाद मिश्र

श्रद्धा, 21 सत्यनगर,
भुवनेश्वर- 751007
मो.9437778601



इंतजार कर रहे थे हम
अस्पताल के ठंडे कमरे में चुपचाप।
तुम्हें ले गए थे स्ट्रेचर पर
आपरेशन थियेटर

सर्जन ने हाड़-मांस काट-छांट कर
सिल रखा था एक लंब इलाका
घुटने से ऊपर और नीचे।

सिलाई की बात कहते ही
याद आ गया एक अरसे पहले
तुम सिलाई मशीन के पास बैठकर
थोड़ी-थोड़ी सिलाई किया करती थी।
मेरी फटी शर्ट या अपनी साड़ी।

एक अरसे बाद
सिलाई मशीन कबाड़ होने से पहले
किसी को दान कर चुकी थी।
मशीन जान गई थी कि अब उसका काम नहींहै,जान चुकी थी कमजोर हाथों की उंगलियों की
वह कमजोरी और निष्ठुर सत्य।