Monthly Magzine
Tuesday 21 Nov 2017

बिरसा मुंडा की वैचारिकी को आगे बढ़ाने का लिया प्रण लेना होगा : अरविंद खैरकर

 

संस्कृति समाचार
 वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छात्र संगठन अम्बेडकर स्टूडेंट्स फोरम द्वारा ‘क्रांतिसूर्य बिरसा मुंडा’ की 141वीं जयंती समारोह व खुली परिचर्चा के साथ मनाई गई। परिचर्चा का विषय ‘बिरसा मुंडा और वर्तमान में युवाओं की समझ’ रहा। कार्यक्रम का शुभारम्भ बिरसा मुंडा और डॉ. अम्बेडकर की फोटो पर मुख्य वक्ता अरविन्द खैरकर  (प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, वर्धा) व छात्र-छात्राओं ने पुष्प अर्पण करके किया। अरविंद खैरकर ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि बिरसा मुंडा के समय तीर धनुष की जरुरत थी। उसके माध्यम से जमीदारों और साहूकारों के खिलाफ जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए युवाओं को संगठित करके मोर्चा खोला । साथ ही अंग्रेजों के खिलाफ भी समय-समय पर अपने हक और अधिकार के लिए लड़े गए आंदोलनों का जिक्र करते हुए उनके इतिहास पर प्रकाश डाला। बिरसा के आंदोलन को वर्तमान समय में अगर हम देखें तो हमें आज तीर धनुष की जगह पर बाबा साहब द्वारा बताए गए सिद्धांत, कलम और कागज की जरुरत है। आप सभी नौजवानों को बताना चाहूँगा कि संविधान लागू होने से पहले बड़े पैमाने पर हमारे पूर्वजों को पढऩे-लिखने का अधिकार नहीं था। अंग्रेजों ने भारत को गुलाम जरुर बनाया लेकिन उन्होंने सभी के लिए एक सामान नियम कानून बनाए, जिससे यहाँ के ब्राह्मणवादियों में खलबली मच गई और ये गलत सूचना लोगों तक पहुंचाई कि हम सभी अंग्रेजों के गुलाम बने हुए हैं। जबकि इससे पहले यहाँ के मूलनिवासियों पर तरह-तरह के अन्याय-अत्याचार, शोषण और दमन आदि किए जाते थे। इसको बहुत सारे इतिहासकारों ने उल्लेख नहीं किया है। इसलिए वर्तमान समय में बिरसा मुंडा की वैचारिकी से युवाओं को सीख लेना चाहिए।  
इस असवर पर भारी संख्या में विद्यार्थियों व शोधार्थियों ने अपने-अपने क्रांतिकारी विचारों को रखा और विरसा मुंडा के रास्ते पर चलने का प्रण लिया। इस कार्यक्रम का संचालन अनु सुमन बड़ा (शोधार्थी) व आभार अनीश कुमार (शोधार्थी) ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत कुमार सिंह, विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विदेशी छात्राएं,  ईश्वर मुर्मू, रामदेव जुर्री, ज्ञान चंद्रपाल, राकेश दर्रो, दिलीप गिरहे, सुनील, सोनम, मनीष कुमार, राजकुमार, रचना, मिथिलेश बौद्ध, शैलेन्द्र कुमार गौतम, ओम प्रकाश आदि सैकड़ों छात्र-छात्राएं व शोधार्थी भी मौजूद रहे।                                                                     
 प्रस्तुत- दिलीप गिरहे
(केंद्रीय कार्यकारणी सदस्य)
अम्बेडकर स्टूडेंट्स फोरम, म.गां.अं.हिं.वि., वर्धा (महाराष्ट्र)
मो. 8605708392