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Thursday 23 Nov 2017

विमुद्रीकरण से हुई राष्ट्रीय श्रम को भारी क्षति

संस्कृति समाचार

दमोह। मप्र प्रगतिशील लेखक संघ की स्थानीय इकाई द्वारा विमुद्रीकरण और आमजन विषय पर आयोजित  संगोष्ठी में यह आम राय रही कि इससे राष्ट्रीय श्रम की क्षति होने के साथ साथ आम जन परेशान हुआ। दैनिक मजदूर और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। जिससे सकल घरेलू उत्पाद के साथ रुपये का अवमूल्यन भी हुआ है जो हमारी बड़ी राष्ट्रीय क्षति है। इस दौरान हो रही मौतों पर सभी ने संवेदना जताई और मांग  की, कि सम्बंधितों को आर्थिक राहत भी मिलनी चाहिए। संगोष्ठी में गफूर तायर, सुसंस्कृति परिहार, अमर सिंह, महेन्द्र श्रीवास्तव, रामकुमार तिवारी ,बी एम दुबे, ओजेन्द्र तिवारी, जगदीश मलिक, दिनेश राही, सदन नेमा, पी एस परिहार और रमेश चक्रवर्ती की भागीदारी रही। दूसरे चरण में समकालीन कविता का दौर चला जिसमें बी एम दुबे ने बंद पांच सौ हजार /मच गया हाहाकार का सस्वर पाठ कर काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया। ओजेन्द्र तिवारी ने श्रम की पुकार लघु कथा के जरिए शोषण पर कटु प्रहार किया तो पी एस परिहार ने श्रम में यंत्रों से आई पूंजीवादी पीड़ा को उभारा। महेन्द्र श्रीवास्तव ने  फूलों को प्रतीक बनाकर गरीबों की हालत पर सवालिया निशान लगाया। अमर सिंह ने पूंजीपतियों के पाखंड पर तीखे प्रहार किये। दिनेश राही ने भ्रष्टाचार को विषय बनाया वहीं सदन नेमा ने स्वार्थी वृत्ति को आज के संदर्भों से जोडक़र देखा। रामकुमार तिवारी ने चुकती संवेदनशीलता पर मार्मिक रचना पढ़ी। गफूर तायर ने कुछ ना कुछ रचना पाठ करते हुए पढ़ी रचनाओं पर अपनी सटीक प्रतिक्रिया दी। संचालन प्रलेसं अध्यक्ष सुसंस्कृति परिहार ने किया साथ ही आओ हम सब रचना का पाठ किया। आभार श्री जगदीश मलिक ने व्यक्त किया।