Monthly Magzine
Sunday 19 Aug 2018

देश से एकालाप


विप्लव ढकाल (नेपाली कवि)
अनुवाद : चंद्रा गुरुंग

तुम्हारी प्यास मिटाने को
मैंने अपना ख़ून दिया
तम्हारी नग्नता ढँकने को
मैंने अपनी खाल दी
जब तुम भूखे थे
मैंने शरीर का माँस दिया
तुम्हें अमर रखने को
मैंने अपना इतिहास दिया
मेरा ख़ून, खाल, माँस और इतिहास
कहाँ फेंक दिए तुमने ?
कहाँ फेंक दिए?
और आज फिर क्यों तुम
मेरे बेटे के आगे
इस तरह नंगे
और खाली हाथ खड़े हो ?
मुझे गुमनाम शहीद बनाने वाले देश
यह प्रश्न
मैं तुमसे पूछ रहा हूँ ।