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Tuesday 21 Nov 2017

कलाकार बच्चा

 

 मैं आसमान की तस्वीर बनाना
चाहता हूँ.
बनाओ, मेरे बच्चे
मैंने बना लिया
और तुमने इस तरह
रंगों को क्यों फैलाया
क्यूंकि आसमान का
कोई छोर ही नहीं है
मैं पृथ्वी की तस्वीर बनाना चाहता हूँ
बनाओ, मेरे बच्चे
मैंने बना लिया
और यह कौन है?
वह मेरी दोस्त है
और पृथ्वी कहाँ है?
उसके हैण्डबैग में
मैं चंद्रमा की तस्वीर बनाना चाहता हूँ
बनाओ, मेरे बच्चे
नहीं बना पा रहा हूँ मैं
क्यों ?
लहरें चूर-चूर कर दे रही हैं इसे
बार-बार
मैं स्वर्ग की तस्वीर बनाना चाहता हूँ
बनाओ, मेरे बच्चे
मैंने बना लिया
लेकिन इसमें तो कोई रंग ही नहीं दिख रहा मुझे
रंगहीन है यह
मैं युद्ध की तस्वीर बनाना चाहता हूँ
बनाओ, मेरे बच्चे
मैंने बना लिया
और यह गोल-गोल क्या है ?
अंदाजा लगाओ
खून की बूँद ?
नहीं
कोई गोली
नहीं
फिर क्या ?
बटन
जिससे बत्ती बुझाई जाती है
सांता क्लाज
अपनी युद्ध जैसी लम्बी दाढ़ी
और इतिहास जैसा लाल लबादा पहने
सांता, मुस्कराते हुए ठिठके
और मुझसे कुछ पसंद
करने के लिए कहा
तुम एक अच्छी बच्ची हो, उन्होंने कहा,
इसलिए एक खिलौने के
लायक हो तुम
फिर उन्होंने मुझे कविता
की तरह का कुछ दिया,
और क्यूंकि हिचकिचा रही थी मैं,
आश्वस्त किया उन्होंने
मुझे डरो मत, छुटकी
मैं सांता क्लाज हूँ
बच्चों को अच्छे-अच्छे खिलौने बांटता हूँ
क्या तुमने मुझे पहले कभी नहीं देखा?
मैंने जवाब दिया : लेकिन जिस सांता
क्लाज को मैं जानती हूँ
फ़ौजी वर्दी पहने होता है वह तो,
और हर साल वह बांटता है
लाल तलवारें,
यतीमों के लिए गुडिय़ा,
कृत्रिम अंग,
और दीवारों पर लटकाने के लिए
गुमशुदा लोगों की तस्वीरें
अनुवाद- मनोज पटेल
बिजूका ब्लाग से साभार