Monthly Magzine
Thursday 18 Jan 2018

जलाटा डायरी (बोस्निया युद्ध पर लिखी एक मासूम बच्ची जलाटा की डायरी पढक़र)

 

असीमा भट्ट
युद्ध का मानवता से कोई लेना-देना नहीं!
मानवता के साथ कोई संबध नहीं
कह्ती है छोटी-सी बच्ची जलाटा
वह युद्ध का मलतब तक नहीं समझती
सिर्फ इतना जानती है कि
युद्ध एक बुरी चीज है
झूठ बोलने की तरह
युद्ध मतलबपरस्त लोगों की साजिश है
जो आदमी को आदमी से
इंसान को इंसान से
धर्म, नस्ल और देश के नाम पर लड़वा रहें हैं
इसमें सबसे अधिक नुकसान
बच्चों को होता है
जलाटा जैसी कितने ही मासूम बच्चे हो जाते हैं बेघर और बेपनाह
जलाटा लिखती है
हमारे शहर, हमारे घर, हमारे विचारों में और हमारे जीवन में युद्ध घुस चुका है
युद्ध के ऊपर पानी की तरह पैसे बहाने वालों
तुम बच्चों के खून में भय का बीज बो रहे हो
बच्चों की खुशी और उसके सपनों का सौदा करने वालों
युद्ध तुम्हारी खुराक बन चुका है
युद्ध कराये बगैर तुम जिंदा नहीं रह सकते!
जो देश, दुनिया में सबसे अधिक भयभीत हैं!
वही भय का कारोबार कर रहे हंै
ऐसे कायर और डरपोक लोगों को समाज से बाहर उठाकर कूड़े में फेंक देना चाहिए
जलाटा, तुम सही कहती हो कि
राजनीति बड़ों के हाथ में है
लेकिन मुझे लगता है बच्चे उनसे बेहतर निर्णय ले पाते
यह दुनिया बेहतर और खूबसूरत होती
काश! कि सचमुच ऐसा हो पता जलाटा !
और तुम्हारा सपना कि एक दिन तुम्हें तुम्हारा बचपन वापिस मिलेगा
तुम्हारी उम्मीद उस बच्चे की तरह है, जो माँ की गर्भ में आँखे बंद किये सो रहा है
जलाटा
देख लेना
एक दिन तुम्हारा और दुनिया के
तमाम बच्चों का सपना पूरा होगा
एक दिन सब ठीक हो जायेगा !
बच्चे खेलेंगे बेखौफ
दौड़ेंगे, भागेंगे चारों दिशाओं में
पूरी हिम्मत के साथ
गायेंगे खुशी के सबसे सुंदर संगीत
सबसे सुंदर दिन के लिए
क्योंकि
बच्चे
मासूम होते हैं
छल-कपट,  धोखा और लालच से दूर
और सुना है सच्चे दिल से निकली दुआएं
कभी खाली नहीं जातीं
आमीन
(जलाटा की डायरी 94 में पढ़ी थी। यह मासूम बच्ची बोस्निया युद्ध के दौरान लम्बे समय तक भूखी-प्यासी तलघर में बंद थी। पता नहीं अब वो जिन्दा है भी या नहीं)