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Saturday 18 Nov 2017

जुलाई अक्षर पर्व में डॉ. सुनील केशव देवधर का आलेख, रेडियो की भाषा, बच्चों के मूल संस्कारों से जुड़ी बहुत महत्वपूर्ण रचना है

-पूरनचंद बाली ‘नमन’, सी/1606, ओबेराय स्पलेण्डर
जेबीएन रोड, जोगेश्वरी (पूर्व) मुंबई-60

जुलाई अक्षर पर्व में डॉ. सुनील केशव देवधर का आलेख, रेडियो की भाषा, बच्चों के मूल संस्कारों से जुड़ी बहुत महत्वपूर्ण रचना है जिसे स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। ‘संगीत की अंतर्धारा’ में लेखिका प्रियंका ने भारतीय संगीत से जुड़ी प्रचुर सामग्री पेश की है, इतनी सारी सूचनाओं में शायद भातखण्डे का उल्लेख भी होना चाहिए था। रमेश गोस्वामी का लेख एक सांस में पढ़ा गया यद्यपि लेखक और उसके विषय (अशोक सेकसरिया) दोनों से मैं अपरिचित हूं.एक वाक्य पर नजर गड़ जाती है : अशोक की उदारता पर किसी के मुंह से तारीफ का एक लफ्ज  नहीं सुना।
हमारा देश इतना क्यों पिछड़ा है (बावजूद बहुत ऊंचा दर्शन होने के...) इस प्रश्न के उत्तर में श्रीमती एनी बेसेन्ट ने कहा था : बिकाज  यू इंडियन आर नॉट जेनरस!