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Tuesday 16 Oct 2018

‘अक्षर पर्व’ का नव्यांक (जून-2016) मिला। प्रत्येक वर्ष ‘रचना वार्षिकी’ और ‘उत्सव’ शीर्षक दो सुसमृद्ध व संग्रहणीय अंक अपने पाठकों तक पहुंचाना निश्चय ही ‘अक्षर पर्व’ की अपनी उल्लेखनीय पहचान बन गई है। एतदर्थ अंक की संपादिका सर्वमित्रा जी

प्रो. भगवान दास जैन

अहमदाबाद-382445 (गुजरात)

‘अक्षर पर्व’ का नव्यांक (जून-2016) मिला। प्रत्येक वर्ष ‘रचना वार्षिकी’ और ‘उत्सव’ शीर्षक दो सुसमृद्ध व संग्रहणीय अंक अपने पाठकों तक पहुंचाना निश्चय ही ‘अक्षर पर्व’ की अपनी उल्लेखनीय पहचान बन गई है। एतदर्थ अंक की संपादिका सर्वमित्रा जी

अशेष बधाइयों की अधिकारी हैं। इस बार के ‘रचना वार्षिकी’ अंक में आपके  द्वारा निर्धारित /प्रस्तुत दस मुद्दों/प्रश्नों के आधार पर देश के सुख्यात विद्वज्जनों के जो आलेख संकलित किए हैं उनमें धर्म, संस्कृति, राजनीति, वैश्विक क्षितिज पर गहराता आतंकवाद, तथाकथित सेकुलारिज़्म, असहिष्णुता जैसे ज्वलंत विषयों की तलस्पर्शी छानबीन की गई है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुसुप्त राजनीतिक कर्णधारों को झकझोर कर जगाने और अनास्था व अधर्म में आपादमस्तक डूबे तथोक्त धर्म धुरंधरों को मानवीय सरोकारों का सीधा-सच्चा मार्ग दिखाने में अंक के विविध आलेख किंग। प्रस्तुत ‘अक्षर पर्व’ का रचनावार्षिक अंक महत्वपूर्ण सिद्ध होगा इसमें संदेह का कोई स्थान नहीं। अंक सर्वथा संग्रहणीय है। अंकस्थ सभी आलेखकारों को हार्दिक साधुवाद।