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Wednesday 22 Nov 2017

‘अक्षर पर्व’ का मई 2016 का अंक नवीन स्तरीय सामग्री से समृद्ध है।

प्रो. भगवानदास जैन, अहमदाबाद-382445 (गुजरात)
‘अक्षर पर्व’ का  मई 2016 का अंक नवीन स्तरीय सामग्री से समृद्ध है। हर बार की भांति इस अंक में भी ललित जी ने एक सर्वथा अछूते विषय पर मानवीय विचार व्यक्त किये हैं। आपने अपने समय की लोकप्रिय पत्रिकाओं, नवनीत, कादम्बनी, साप्ताहिक हिन्दुस्तान व धर्मयुग का स्मरण करते हुए अपने कथयितव्य की सार्थक प्रस्तुति की है। प्रचलित साहित्य विधाओं से हटकर भी हिन्दी में भी बहुत कुछ लिखा जा रहा है यह तथ्य आपने ‘भारतीय डाक : सदियों का सफरनामा’ (अरविंद कुमार सिंह) शीर्षक ग्रंथ के संक्षिप्त किन्तु सूक्ष्म परिचय द्वारा पाठकों तक पहुंचाया है। कविताएं समकालीन बोध से संपृक्त हैं, सार्थक हैं। गजल बस ठीकठाक है, उसमें प्रभावी नगज्जुल का अभाव है। दलित वर्ग की एक उदीयमान प्रतिभा रोहित वेमुला का असामयिक निधन सचमुच हमारे राष्ट्र की एक कलंकित दुर्घटना है। सुश्री सर्वमित्रा ने ‘बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि’ शीर्षक ‘उपसंहार’ लेख में यथार्थ ही कहा है कि हिन्दू धर्म की जातिभेद व वर्गभेद जैसी कुरीतियों के चलते न तो हम देश में सर्वसुलभ न्याय व्यवस्था कायम कर पाएंगे और न ही हम बाबा साहेब को सच्ची श्रद्धांजलि दे पाएंगे।