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Tuesday 21 Nov 2017

‘अक्षर पर्व’ का अगस्त-16 अंक ‘आजादी के सुर’ विशेषांक मिला।

 

चंद्रसेन विराट,

121, बैकुंठधाम कॉलोनी, आनंद बाजार के पीछे, इंदौर- 452018 (म.प्र.) मो. 09329895540

‘अक्षर पर्व’ का अगस्त-16 अंक ‘आजादी के सुर’ विशेषांक मिला। यह संतोषजनक है। ‘प्रस्तावना’ में इस बार फिर ललितजी ने  प्रयोग दुहराया है। वे पहले भी ऐसा कर चुके हैं। इस बार चार काव्य संग्रहों की सुष्ठु, सम्यक एवं संतुलित समीक्षा कर दी है। पृष्ठ 9 से 22, आजादी के नगमे- क्या गीत, $गजलें, नज्में सब प्रेरक हैं। इनके पठन ने अलग ही सुख दिया है। कुशेश्वर की स्थानीय बोली में लिखी यथार्थपरक एक गरीब की क्षोभ व्यक्त करती कविता जो अपने पुत्र से ‘झंडोलन’ करवा देता है बहुत प्रभावी है। राघवेन्द्र तिवारी का नवगीत सुन्दर लघुगीत है। डॉ. मधुकर खराटे ने गलकार दरवेश भारती पर बहुत सार्थक प्रामाणिक लिखा है। डॉ. बी.एल. अच्छा की समीक्षा ‘शब्द को कालयात्री बनाती कविताएं’  सर्वथा पठनीय है। उनकी दृष्टि कवि द्वारा व्यक्त स्थानीयता लोकल की सूक्ष्मता को देख गई है यही विशेषता है।