Monthly Magzine
Saturday 18 Nov 2017

राष्ट्रस्तुति गान प्रतियोगिता

प्रभाकर चौबे
शुक्ला प्रोविजन स्टोर्स के पास, गोल चौक, रोहिणीपुरम, रायपुर (छ.ग.) 492010
मो. 09425513356
राज्य में देशभक्तों की सूची बन रही थी। राज्य की ओर से घोषणा की गई थी कि राष्ट्रस्तुति का गायन जिसने जितनी बार किया हो, वह राज्य के देशभक्त प्रकोष्ठ-दीवान के कार्यालय में अपना नाम लिखाए। देशभक्ति के प्रमाण पत्र में इसका उल्लेख किया जाएगा। सबसे ज्यादा बार गाने वाले को ‘देशभक्त शिरोमणि’ अलंकरण दिया जाएगा। इसके साथ ही हर एक को सम्मानित कर पुरस्कार स्वरूप मुद्राएं व पद भी दिए जाएंगे। और इसी को सूचीबद्ध करने के लिए ‘देशभक्ति प्रकोष्ठ’ में तैयारी की गई थी। अधिकारी और कर्मचारी कागज-कलम लेकर बैठे थे। सूची में नाम लिखाने वालों की प्रतीक्षा थी।
प्रमुख ने पूछा- प्रजा आ नहीं रही।
सहायक ने कहा- आएगी प्रजा। देशभक्ति का मामला है, लोग खा-पीकर आराम से आते हैं। इतने में एक व्यक्ति ने कक्ष में प्रवेश किया। बोला- मुझे अपना नाम सूची में दर्ज कराना है।
सहायक ने पूछा- राष्ट्र स्तुति का गायन कितनी बार किया।
व्यक्ति ने कहा- एक बार।
सहायक नाराज हो उठा- बस एक बार। और आ गए नाम दर्ज कराने। परे हटो। पीछे वाले को आने दो। एक बार गायन करने वाला सबसे अंत में रहेगा। और पीछे वाले को सामने बुलाकर पूछा- कितनी बार गायन किया।
व्यक्ति बोला- बारह बार।
सहायक बोला- बस, बारह बार। चौबीस घंटे में बारह बार। दो घंटे में एक बार। बाकी समय क्या करते रहे। यहां तो ऐसे लोग हैं जिन्होंने हर मिनट गान किया।
व्यक्ति बोला- जी।
सहायक ने डांटा- क्या जी। हर मिनट का मतलब समझते हो। चौबीस घंटे में कितने मिनट हुए। एक घंटे में कितने मिनट होते हैं।
‘जी साठ मिनट’- व्यक्ति ने कहा।
‘तो चौबीस घंटे में कितने मिनट’ सहायक ने तपाक से पूछा। अगले ही क्षण बरसा- नहीं मालूम। एक दिन में चौबीस घंटे, ठीक है। एक घंटे में साठ मिनट, ठीक। तो गुणा कर लो। गुणा करना भी नहीं आता। अरे साठ गुणा चौबीस- कितने आए। नहीं मालूम। पौवा। अद्धा। पौने डेवढ़ा। अढ़इया। कुछ सीखा है। साठ गुणा चौबीस जितना होता है, पहले यह निकालो। फिर पता चलेगा कि कितनी मर्तबा राष्ट्र स्तुति गाया है। सहायक को बड़-बड़ करता सुन प्रमुख ने टोका- क्या बात है। जल्दी निपटाओ। एक-एक आदमी के लिए इतना वक्त लोगे तो दिनभर में कितने आदमियों की सूची बना पाओगे।
सहायक बोला- महोदय, इसे गुणा करना नहीं आता। साठ गुणे चौबीस का उत्तर नहीं दे पा रहा है।
प्रमुख ने कहा- इसे गणित पढऩे कहो।
सहायक ने कहा- जाओ गुणा-भाग सीखो और पहाड़ा रटकर आओ।
‘अगला’ सहायक ने आवाज लगाई।
अगला सामने आया।
सहायक ने पूछा- कितनी बार राष्ट्र स्तुति गाया।
व्यक्ति बोला- छत्तीस बार।
सहायक बोला- ये क्या हुआ। छत्तीस बार माने कि एक घंटे में डेढ़। तभी न चौबीस घंटे में छत्तीस हुआ। अरे तूने क्या राष्ट्र स्तुति को तोडक़र गाया। या तो पूरा गाता। चौबीस बार होता। या एक घंटे में दो गाता तो अड़तालिस होता। ये छत्तीस बार क्या है। किस अनुपात में गाया। उल्लू बनाता है। मजाक करता है। पुरस्कार लेने कुछ भी कहा जा रहा है। लेकिन हम सब समझते हैं। फंस नहीं सकते। न उल्लू बन सकते। राज कर्मचारी हैं। चले आए छत्तीस बार गाया कहते हुए। अभी पुलिस के हवाले कर दूंगा। हटो। अगला।
अगला सामने आया। सहायक ने पूछा- कितनी बार।
व्यक्ति बोला- नीं जानो महराज।
नीं जानो का क्या मतलब। कितना बार गाया, यह नहीं मालूम।
व्यक्ति- नीं गिन सकों साहेब। फेर कई घांव गाये हों। कतक घांव, ये ला नीं  बता सकों। पढ़े-लिखेनइ हों, साहेब। फेर गाए हों। लइका गवाइस, में गायेंव।
सहायक- अनपढ़ है। निरक्षर। राष्ट्रस्तुति निरक्षरों के गाने के लिए नहीं। जा पहले साक्षरता में भर्ती हो। अक्षर ज्ञान, अंक ज्ञान, गिनती सीख, फिर गाना। फिर आना।
फिर तो कुछ ऐसा हुआ कि जो आता वही कहता कि पढ़ा-लिखा नहीं हूं। लेकिन गाया हूं।
सहायक झल्लाया। प्रमुख से बोला- महोदय राज्य में निरक्षरता है। पढ़े-लिखे लोग कम हैं। महिलाएं तो एकदम नहीं। निरक्षरों को तो पुरस्कार, सम्मान दे नहीं सकते। क्या करें।
प्रमुख ने कहा- हमें क्या करना है। चलो राजा साहब से पूछें। राजा के साथ काफी विचार-विमर्श हुआ। गहन चिंतन हुआ। हर पक्ष पर गौर किया गया।
फिर राजा ने कहा- ऐसा करो जो स्वच्छ कपड़ों में हों। जो आश्वासन दे रहे हों। जो सुंदर हों। राष्ट्रस्तुति गान भले याद न हो लेकिन होंठ हिलाते रहे हों। उन्हें सम्मानित कर दो। ऐसों को पुरस्कार दे दो। और हां राज्य में बड़ी संख्या में निरक्षरता है, यह बाहर न जाए। बदनामी होगी। गौरवर्ण, सुन्दर, सुगढ़, धवल वस्त्र वालों को सम्मान देना राज्य-सम्मान का सम्मान होता है और इससे यह भी संदेश जाता है कि राज्य में सब सुंदर हैं। खूब पढ़े-लिखें और ज्ञानी हैं। ठीक इसी समय राज का दीवान दौड़ा आया। राजा साहेब के कान में उसने कुछ कहा। राजा साहब कुछ अचकचाए। फिर सम्भले। बोले- राष्ट्र स्तुति पुरस्कार स्थगित। पता चला है कि राजपुरोहित ने गलत पंचांग देखकर राष्ट्रस्तुति की तिथि व मुहुर्त की गलत जानकारी दी थी। पंचांग गलत था। अब आगे सही तिथि देखकर राष्ट्रस्तुति की पुन: प्रतियोगिता होगी। यह खबर प्रजा को दी गई।
एक ने कहा- ये का ये कइसे पतरा देखते। अतिक हांव-हांव होइस अऊ रद्दा में गाड़ी रबक गे...।
प्रजा में से एक बुजुर्ग ने कहा- राजा ठीक करते हैं। राजा की जय, शत्रुओं का क्षय।