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Thursday 18 Oct 2018

सफेद बगुले

जीवन शुक्ल
धर्मधाम, ग्वालमैदान
कन्नौज-209425
मो. 9415471813
सफेद बगुले

तुमने जिस पेड़ के नीचे
बचपन बिताया
उससे पत्तियां नहीं सोना झरता था।
जिस डाल पर तुमने
पींगे भरीं
उस झूले से आसमान डरता था।
और मैं..!
उस खेत से लौटा हूं
जहां धूप दौड़ती है
चांदनी अठखेलियां करती हैं
लेकिन उससे प्राण फूटता है
और उस वृक्ष का फल
प्राणदान देता है
जब कभी टूटता है
मैदानी भेडिय़ों ने
उस पेड़ को काट डाला
जिसके खोके में तुम्हारा मन
एक घोंसला छोड़ आया था
और पेटेंट के चीते
उस खेत को घेरे हैं
जिसकी माटी की गंध
मेरे तन से फूटती है
मत देखो! उनकी तरफ
वे हमारी आस्था के आधार
तुम्हारे पेड़, मेरे खेत
दोनों से दूर
कुर्सी को सींच रहे हैं।