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Wednesday 22 Nov 2017

इस बसंत मैं तुम्हें


राजेन्द्र उपाध्याय

बी -108 , पंडारा रोड , दिल्ली -110003
मो . 9953320725
पिछले बसंत मैंने तुम्हें कुछ नहीं दिया
इस बसंत मैं देना चाहता हूं वो सब
जो पैसे से नहीं खरीदा जा सकता
जो कभी चुराया नहीं जा सकता
जो किसी से उधार नहीं मांगा जा सकता
मैं देना चाहता हूं तुम्हें वो सब
जो कभी किसी ने किसी को न दिया होगा।

इस बसंत मैं वो सब देना चाहता हूं
जो पिछले बसंत
और उससे पिछले बसंत नहीं दे सका था
जो अगले बसंत और उससे अगले बसंत नहीं दे पाऊंगा
इस धरती के सब फूल छोटे-बड़े इन्द्रधनुष
असंख्य तारागण/कैलाश मानसरोवर का अकेला एक पुष्प
असंख्य फसलें असंख्य खेतों की सब दे जाऊंगा

एक ऐसा बसंत जो कभी पतझड़ में नहीं बदलेगा
एक ऐसा कैंलेडर तारों से भरा हुआ
जिसे कभी आसमान से उतारा न जायेगा
जिसे कभी दीवार से उतारा न जाएगा
जो बरसों बरस रहेगा तुम्हारे साथ
बरसों बरस तुम्हारे साथ रहेगा बसंत
उम्र भर
तब भी जब मैं नहीं रहूंगा


उम्र मुझे धीरे-धीरे चुग रही है
पर मेरे जीवन के रूपहले सुनहरे पन्ने सब मैं तुम्हें दे जाऊंगा।
इस बसंत मैं तुम्हें दे जाऊंगा वो सब
जो बैंक में नहीं मिलता
जो हाट-बाजार में नहीं बिकता
जिसका ऑर्डर नहीं दिया जा सकता
जो किसी पेड़ पर किसी खेत में नहीं मिलता
जिसे डाउनलोड नहीं किया जा सकता।