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Saturday 18 Nov 2017

जुलाई अंक की प्रस्तावना में ललित जी ने वरिष्ठ कवि चंद्रकांत देवताले के काव्य संग्रह की सुष्ठु एवं सम्यक समीक्षा की है।

चंद्रसेन विराट, इंदौर।

जुलाई अंक की प्रस्तावना में ललित जी ने वरिष्ठ कवि चंद्रकांत देवताले के काव्य संग्रह की सुष्ठु एवं सम्यक समीक्षा की है। वरिष्ठ गज़़लकार नूर मुहम्मद नूर की लंबी कविता भूख प्रभावित करती है। सिद्ध होता है कि प्रतिभा के हाथों जो भी माध्यम आए, वह उसके स्पर्श से प्रकाशवान हो उठता है। कमल कुमार का लेख देवदास का स्त्रीपाठ भी सर्वथा पठनीय चिंतन है। यह स्त्री चरित्र की बारीकी लेखिका की तीसरी आंख ही देख सकी है। सामान्यतया पुरुष पाठकों की सहानुभूति प्रेम में दुखी देवदास के साथ हो लेती है।