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Saturday 25 Nov 2017

‘अक्षर पर्व’ के जुलाई-16 अंक में तुम्हारी प्रस्तावना में डॉ. चन्द्रकांत देवताले की काव्य-पुस्तक की समीक्षा पढक़र मुझे तुम्हारी उस समीक्षा की याद आ गई जो तुमने डॉ. मलय की काव्य-कृति के बारे में लिखा था।

डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया
ए-7, फारचून पार्क, जी-3, गुलमोहर भोपाल (म.प्र.)

‘अक्षर पर्व’ के जुलाई-16 अंक में तुम्हारी प्रस्तावना में डॉ. चन्द्रकांत देवताले की काव्य-पुस्तक की समीक्षा पढक़र मुझे तुम्हारी उस समीक्षा की याद आ गई जो तुमने डॉ. मलय की काव्य-कृति के बारे में लिखा था। दोनों समीक्षाएं अच्छी नहीं, बहुत अच्छी हैं। समीक्षा के लिए कृतिकार की रचनाओं के मूल मर्म तक पहुंचकर उन्हें समझाना और तटस्थ भाव से उनका विश्लेषण जरूरी है। तभी कृति के साथ न्याय हो सकता है। तुम्हारे पास वह दृष्टि और क्षमता के साथ अच्छी भाषा भी है।
इस अंक में डॉ. कान्तिकुमार जैन का संस्मरण उल्लेखनीय है। सच बात तो यह है कि डॉ. जैन ने विगत वर्षों में बहुत अच्छे-अच्छे संस्मरण हिन्दी जगत को दिए हैं। वे संस्मरण लिखने में पारंगत हैं। संबंधित पात्र का भीतर-बाहर का सारा खाका जीवंत रूप में सामने ला देते हैं। अश्विनी कुमार दुबे का व्यंग्य भारत में जन-जन में व्याप्त भ्रष्टाचार का सही चिट्ठा है। उसे पढक़र यहां कहा जा सकता है कि ‘हर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजामे गुल्सितां क्या होगा।’ चपरासियों, पटवारियों, बाबुओं, की बातें तो छोडिय़े, बड़े-बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी इसमें शामिल हैं। आज ही एक पत्रिका के सम्पादकीय में पढ़ा कि राजस्थान के चार सीनियर आई.ए.एस. अधिकारी घूस लेते पकड़े गए जो अब जेल में  है। नूर मुहम्मद ‘नूर’ की कविता ‘भूख’ बड़ी व्यापक, जीवंत और प्रभावशाली है। इसका दिग्दर्शन बखूबी कराती है। बड़ी प्रभावशाली जानदार कविता है। मंदाकिनी श्रीवास्तव की कविता ‘पापा और मैं’ पाठक के अन्तर्मन को छूने और हिलाने में सक्षम है। सुनील देवधर ने ‘रेडियो की भाषा’ लेख में आज हिन्दी में हो रहे अशुद्ध प्रयोगों और रेडियो के योगदान की सोदाहरण चर्चा की है। मधुरेश और रमेश गोस्वामी के संस्मरण बड़े आत्मीय है। सुधा अरोड़ा का साक्षात्कार उनके विचारों को समझाने में सहायक है। सर्वमित्रा के उपसंहार पर यहां कहा जा सकता है कि आज वाणी और भाषा का संयम नहीं रहा। विशेष रूप से उच्च वर्ग लोकतंत्र का मनमाना दुरुपयोग कर रहा है। भाषा का अमर्यादित होना भी एक प्रकार की हिंसा ही है। कहानियां सभी पठनीय और सार्थक है। समीक्षा के लिए इतना स्थान देना तुम्हारी उदारता का परिचायक है।