Monthly Magzine
Thursday 18 Jan 2018

जुलाई अंक में कांतिकुमार जैन के संस्मरण से जानकारी प्राप्त हुई कि तथाकथित भगवान का दर्जा पाने वाले ओशो रजनीश, दरअसल चंद्रमोहन जैन थे और विद्यार्थी जीवन से ही वे बड़े प्रतिभासंपन्न व तेजसवी थे।

डॉ.सेराज खान बातिश,

खिदिरपुर, कोलकाता, मो.9339847198

जुलाई अंक में कांतिकुमार जैन के संस्मरण से जानकारी प्राप्त हुई कि तथाकथित भगवान का दर्जा पाने वाले ओशो रजनीश, दरअसल चंद्रमोहन जैन थे और विद्यार्थी जीवन से ही वे बड़े प्रतिभासंपन्न व तेजसवी थे। लेकिन हमारे एक मित्र यह सब मानने को तैयार नहींहैं..। इसी अंक में नूर मुहम्मद नूर की कविता भूख प्रकाशित है। भाई ने भूख को इतनी बार पेरा है कि भूख भूत हो गई है। शर्मिला बोहरा जालान की कहानी एक अनकही कहानी मृत्युशैय्या पर पड़ी मां का आत्ममंथन, प्रेम की उत्पत्ति और अपने अंतस में पड़े वर्षों के गोपन को उद्घाटित करने की कहानी है। मृत्यु के समय व्यक्ति अपने उन क्षणों को  याद करता है जो उसका सबसे प्रिय और एकांगी होता है। शर्मिला ने इस कहानी में बड़े अद्भुत तरीके से एक मां के संवाद को कहानी में प्रस्तुत किया है। रमेश गोस्वामी ने दिवंगत अपने मित्र, जिन्हें प्राय: लोग भूलते जा रहे हैं, घर, परिवार और शहर की स्मृति से भी वे बिसूरते जा रहे हैं, अशोक सेकसरिया को याद कर हमारी याददाश्त को रौशनी प्रदान करते हुए बड़े कलात्मक ढंग से अपनी निजता को साझा किया है। सच है अशोक जी अमीर बाप के फकीर बेटे थे। हमारा सौभाग्य कि हम उस फकीर से रू ब रू रहे।