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Tuesday 21 Nov 2017

किसान का सोना


ज्ञानदेव मुकेश
   उस किसान के पास बीज थे न खाद। फिर भी वह अपने खेतों में कुड़ाई का काम कर रहा था। उसे उम्मीद थी कि पहले कुड़ई कर लेते हैं, फिर कोई-न-कोई रास्ता निकल आएगा। वह पसीने तर-बतर होता रहा और खेत जोतता रहा। उसकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। तभी उसका हल जमीन के अंदर गड़े हुए किसी घड़े से टकराएगा और ‘ठन्न्’ से आवाज हुई। आवाज सुनकर किसान की बांछें खिल गईं। मिट्टी के अंदर से एक बड़ा-सा घड़ा बाहर निकला। घड़ा में एक तरफ सोने के सिक्के रखे मिले तो दूसरी तरफ खाद और बीज के पैकेट। खाद और बीज उम्दा किस्म के थे। किसान ने जल्दी से खाद और बीज को बाहर निकाला और सोने के सिक्के सहित घड़े को जमीन के अंदर वहीं वापस रख दिए। उसने जल्दी-जल्दी बीज को खेत में रोप दिए और खाद का छिडक़ाव कर दिया।  घर आकर प्रसन्नचित्त किसान ने अपनी पत्नी से कहा, ‘‘सुनो भाग्यवान। पता है, आज हमारे खेत में सोना मिला।’’ पत्नी ने कहा, ‘‘कहा है ? लाओ दिखाओ।’’
    किसान ने कहा, ‘‘दिखाऊं कैसे ? उन्हें तो मैंने खेत में रोप दिए।’’           
फ्लैट संख्या-102, ई-ब्लॉक,  प्यारा घराना कम्प्लेक्स,  चंदौती मोड़,   गया-823001 (बिहार)