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Thursday 23 Nov 2017

लडक़ी और कठपुतली

 

ज्योतिकृष्ण वर्मा
रविन्द्र भवन
35 फिरोजशाह रोड
नई दिल्ली 110001
मो.9811763579
लडक़ी और कठपुतली  
 
लडक़ी
कठपुतली का नाच
देख रही है
फिल्मी गानों की धुन पर
ठुमक ठुमक कर
नचा रहा है उसे
सूत्रधार
धीरे-धीरे
लडक़ी
खो चुकी है
कठपुतलियों की
दुनिया में
 
सपने में खोई वो
नाच रही है
मदमस्त
किसी धुन में
 
नाच खत्म हुआ
कठपुतली का
ठुमकना भी
 
लडक़ी हो जाना चाहती है
कठपुतली
कभी-कभी !

बराबरी   
 मुख्यधारा से
दूर रखा है
सत्ता ने जिसे
वो हाशिये का आदमी है
कुछ देना हो उसे
तो वे
निकाल लेते हैं
कोई रास्ता
न देना हो
तो
रास्ता
अवरुद्ध करने के रास्ते
जानते हैं वे
बखूबी
प्यादे
और
हाशिये के आदमी को
देखते हैं वे
एक नजर से !