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Wednesday 22 Nov 2017

विषमता के रहते आजादी अर्थहीन - प्रो. सुमन्त पंड्या

संस्कृति समाचार
दिल्ली।  आजादी संवाद का ही पर्याय है।  अपनी ही बात हमेशा सही मानते रहना और संवाद न करना आजादी के विरुद्ध है। हिन्दी के संस्मरणकार और बनस्थली विद्यापीठ के पूर्व आचार्य प्रो सुमन्त पंड्या ने हिन्दू कालेज की हिंदी नाट्य संस्था अभिरंग द्वारा भारतीय स्वतंत्रता की 70 वीं वर्षगाँठ पर आयोजित एक भाषण प्रतियोगिता में कहा कि विषमता के रहते आजादी अर्थहीन है तथापि हमें यह मानना होगा कि आजादी बेलगाम नहीं हो सकती। सामुदायिक-सामाजिक मर्यादाओं की भीतर ही आजादी का अर्थ खोजना चाहिए।  प्रो पंड्या ने कहा कि यह संकट का समय है और इस समय मर्यादाओं का उल्लंघन खतरनाक भी हो सकता है। आयोजन में प्रसिद्ध कथाकार और निबंधकार प्रेमपाल शर्मा ने प्रतियोगियों द्वारा सच्ची आजादी का अर्थ विषय पर व्यक्त किए विचारों की गंभीर विवेचना की। शर्मा ने कहा कि युवा पीढ़ी द्वारा मौलिक चिंतन को बढ़ावा देने वाले ऐसे आयोजनों का स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतियोगिता में क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय रहे विद्यार्थियों प्रतिभा सिंह, विनीत कांडपाल और उत्कर्ष पांडे के नामों की घोषणा की।   इससे पूर्व अभिरंग के परामर्शदाता डॉ पल्लव ने अभिरंग के इतिहास तथा अभिरंग की गतिविधियों के बार में बताया। संयोजन कर रहे आशुतोष कुमार शुक्ल ने अतिथियों सहित सभी प्रतिभागियों का आभार प्रदर्शित किया।
आशुतोष कुमार शुक्ल, संयोजक, अभिरंग, हिन्दू कालेज, दिल्ली