Monthly Magzine
Saturday 18 Nov 2017

एक स्टुपिड ट्री की कहानी

  श्याम सखा श्याम
703 जीएचएस 88, से. 20, पंचकूला-1341113 (हरियाणा)
मो. 9416359019
सुहैल भाई की पत्रिका के आवरण अक्सर धरती से जुड़े प्रकृति के विहंगम दृश्य लिए होते हैं। सूखे ठूंठ में भी जान डाल देना सुहैल भाई की फोटोग्राफी का कमाल होता है। मैंने अनेक बार उनके साथ बीहड़ों, पर्वतीय क्षेत्रों की यात्राएं की हैं। कभी कार के बैकव्यू मिरर में उन्हें किसी पेड़ का तना खूबसूरत लगा और लगे कार को ब्रेक, फिर तो जाने कितने कोणों से उस पेड़ का फोटो ले डालेंगे। मेरे ऑफिस के बाहर एक कोने में एक अमलतास का बूढ़ा पेड़ है जिस पर शायद ही किसी की नजर पड़ती होगी सुहैल भाई ने देखा और लेट गए पीठ के बल जमीन पर और फोटो ले डाली उस पेड़ की। जब वह फोटो पत्रिका के आवरण पर आयी तो सबको यही लगा कि यह किसी घने जंगल में खड़ा पेड़ है जबकि ऑफिस की बिल्डिंग ने इसे तीन तरफ  से घेर रखा है मगर यह उनकी पीठ के बल लेटने का कमाल था कि फोटो में फूलों से लदा पेड़ और नीला आसमान भर दिख रहे थे। कंकरीट का जंगल गायब था। सुहैल भाई घुमक्कड़ तबीयत के आदमी हैं और गाहे बगाहे मुझे मिलने भी आ जाते हैं। पिछले महीने जब यहां आए हुए थे तो हम शाम के वक्त ठंडी सडक़ पर घूमने निकले थे। ठंडी सडक़ को यह नाम अंग्रेजों के जमाने की देन है। इस सडक़ पर उस वक्त भी और अब भी बड़े सरकारी अफसरों के बंगले हैं। कभी इस सडक़ पर इतने अधिक छायादार वृक्ष होते थे कि इसे ठंडी सडक़ कहा जाने लगा था। सुना है कि किसी जमाने में तो इस पर एक नोटिस बोर्ड लगा था- जानवरों व इंडियन्स का आना मना है। मगर आजादी के बाद न केवल वह बोर्ड हटा दिया बल्कि एक-एक कर अनेक भारी भरकम पेड़ काट कर अफसरों की निजी कोठियों के चौखट दरवाजों में बदल गए। सारी सडक़ पर मात्र आठ-दस पुराने पेड़ बचे हैं, शेष की जगह यूक्लिपटिस तथा पोपलर के पेड़ों ने ले ली है।
जब हम सैर कर रहे थे, अचानक एक कार एक बड़े पेड़ से जा टकराई। हम इस आशंका से कि कहीं कोई जख्मी न हो गया हो उधर दौड़ पड़े, मगर शुक्र है कि चालक जो एक सोलह साल की नवयौवना थी बाल-बाल बच गई थी। हमारे पहुंचने तक वह कार से बाहर निकल चुकी थी। वह एक मॉडर्न लडक़ी थी जिसने जीन्स व चोलीनुमा टॉप पहन रखा था। हमारे पहुंचने तक वह कार व पेड़ की भिड़ंत का मुआयना कर चुकी थी तथा सेल फोन निकाल कर कहीं बात कर रही थी, डैडी, आप जल्द आइये, मेरी कार एक स्टुपिड ट्री से टकरा गई है।
हाँ मैं घर के नजदीक ठण्डी सडक़ पर हूं, मुझे कोई चोट नहीं लगी है।
उसने सेल फोन बंद किया कि एक राहगीर ने पूछ लिया, बेबी आप ठीक तो हैं चोट तो नहीं लगी?
शटअप यू माइंड योर ऑन बिजनेस। आई एम डीसीज डॉटर, वह चीखी। वह बुजुर्ग राहगीर कान दबाकर चलता बना। ऐसे में मेरे सहायता के मनसूबों पर पानी फिर गया। मैं वापिस लौटने लगा तो सुहैल भाई ने मेरा हाथ पकड़ा और साथ बने पार्क में चले आए। यह पेड़ पार्क के बाहर सडक़ के एक कोने पर खड़ा था। पार्क में पहुंचकर सुहैल भाई, पार्क की चारदिवारी के साथ चलते-चलते उसी पेड़ के पास मगर पार्क की चारदिवारी के अन्दर आ खड़े हुए।
पेड़ की तरफ उंगली उठाकर उन्होंने कहा राजन देखो, प्रकृति की अद्भुत लीला। मैंने देखा और हैरान रह गया पेड़ नीम का था जिसके मोटे तने पर जमीन से लगभग आठ फीट ऊपर जहां तना दो भागों में बँटा था एक भाग जो कटा हुआ लग रहा था वहां एक पीपल का तना उठा दिखा। ध्यान से देखने पर पीपल के साथ ही एक छोटा सा बड़ भी वहीं जमीन से आठ फीट ऊपर अपना आसन जमा, आसमान की तरफ  बाहें फैलाता दिखा। नीम का तना अपने ऊपरी सिरे पर फूल कर खुल गया था, जहां से पीपल की जड़ नीचे नीम के तने में घुसी दिख रही थी।
मैं लगभग रोज यहां से गुजरता हूं, मगर मैंने कुदरत के इस करिश्मे पर कभी ध्यान नहीं दिया था। अभी मैं भाव विभोर उस पेड़ को देख ही रहा था कि वहां दो-तीन कार व जीप आकर रुकी। उसमें से शहर के डिप्टी कमिश्नर मिस्टर सिंह उनकी पत्नी व उनके कई मातहत व जीप से तीन-चार पुलिस वाले उतरे। डीसी की पत्नी ने बेटी को बांहों में लेना चाहा मगर वह उन्हें परे धकेलकर अपने पिता का हाथ पकडक़र कार व पेड़ की भिडं़त दिखाने लगी। बोली, यू सी पापा, यह पेड़ सडक़ के बीचों-बीच खड़ा है और आपके मातहत और आप सडक़ पर चलने वालों की सेफ्टी से बेखबर हैं। अगर मैं सावधान नहीं होती तो आज मर ही जाती। इस पेड़ को अभी आज ही कटवाइये। डीसी बोले, ओके बेबी अभी फॉरेस्ट ऑफिसर को बुलाता हूं, आज रात ही कट जाएगा यह  पेड़। जिससे तुम्हें कार चलाना सीखने में परेशानी नहीं होगी। राम सिंह फॉरेस्ट ऑफिसर को बुलवाकर रात को ही पेड़ काटने के लिए कहो मगर तभी डीसी की पत्नी बोल उठी, नहीं रात को पेड़ नहीं कटवाते और फिर इस पर तो पीपल भी लगा है, यह कल भी नहीं कटेगा कल एकादशी है समझे। ओके डार्लिंग, परसों कटवा देंगे, खुश। डीसी बोले थे। ओ नो पाप वाट अेन आर्थोडोक्स ममी इज, लडक़ी बोली फिर मैं कल कार चलाना नहीं सीखूंगी। कोई बात नहीं बेबी एक दिन रेस्ट सही, ममा के सेन्टीमेन्टस का ख्याल रखो। ओ पापा यू ऑलवेज सरेन्डर बिफोर यूअर वाईफ, लडक़ी बोली। वुड यू नॉट लाइक यूअर हसबैंड टु बी सबमिसइव, डीसी ने कहा। ओ नॉटी पापा लडक़ी ने मुस्करा कर कहा और वे लोग दो मातहतों को टूटी कार गैराज में भिजवाने की कह कर चले गए।
उनकी तरफ से ध्यान हटा तो पाया कि सुहैल भाई होठों से हल्की सी सीटी बजा रहे थे। सुहैल भाई सीटी तभी बजाते हैं जब वे गम्भीर होते हैं। मैंने एक सवालिया नजर उनपर डाली तो वे बोले, चलो मेरे साथ।
मैं सुहैल भाई के साथ चलता हुआ बाजार में पहुँच गया। वे एक पेन्टर की दुकान पर खड़े हो गए और बोले भईया, एक छोटा सा बोर्ड है, यह जो यहाँ रखा है ना। उन्होंने एक दो गुणा एक फीट के सफेद पुते बोर्ड की तरफ  इशारा करते हुए कहा, बस इतना सा बना दो।
पेन्टर बोला, क्या लिखना है, लिखकर दे दें तथा कल बोर्ड ले जाएं।
सुहैल  भाई बोले- बस दो शब्द लिखना है, पर बोर्ड आज ही चाहिए।
पर आज तो रात हो रही है सूखेगा कैसे? पेन्टर बोला। कोई बात नहीं गीला ही ले जाएंगे। आप इस पर सिर्फ  लाल रंग से त्रिदेव भगवान लिख दें। सुहैल भाई का कौतुक मेरी समझ से बाहर था। पेन्टर ने बोर्ड लिखकर सुहैल भाई के हवाले कर दिया। सुहैल भाई ने बोर्ड को कन्धे से ऊपर उठा रखा था जिससे किसी राहगीर से न टकराए। उन्होंने एक पन्सारी की दुकान से थोड़े चावल रोली व एक गुच्छा मौली, धूप, अगरबत्ती, रूई व दीया खरीदकर मुझे पकड़ा दिया। रास्ते में फल वाले की दुकान से लेकर दो नारियल मुझे सौंप दिए। हलवाई से सवा किलो गुलदाना भी ले लिया तथा थोड़ा सा घी लेकर हम वापिस उसी पेड़ तक आ गए। तब तक वह कार हटाई जा चुकी थी। सुहैल भाई ने पहले कील गाड़ कर बोर्ड टांगा फिर बड़ी श्रद्धा से मौली पेड़ के तने के चारों ओर लपेट दी। नारियल वहीं फोड़ कर दीया जलाकर धूप अगरबत्ती लगा दी तथा प्रसाद चढ़ाकर राहगीरों को प्रसाद बाँटने लगे। साथ-साथ उन्हें बतला रहे थे कि इस पेड़ पर मन्नत मांगने से उनके बेटे का दाखिला मेडिकल कॉलेज में हो गया है, अत: वह त्रिदेव भगवान का शुक्रिया करने नारनौल से यहाँ पहुँचे हैं। आपने कभी ऐसा चमत्कार देखा है कि नीम का कड़वा पेड़, पीपल और बड़ को अपने ऊपर उगने दे। सब ऊपर वाले की लीला है, आप बड़े भाग्यशाली हैं जो आपके शहर में त्रिदेव भगवान प्रगट हुए हैं। मैं सुहैल  भाई के साथ वहां लगभग डेढ़ घंटा खड़ा रहा और सुहैल  भाई ने तब तक सात-आठ लोगों को त्रिदेव भगवान का प्रसाद खिला दिया था। दस-पांच लोग वहीं हमारे पास खड़े होकर आने-जाने वालों को रोक रहे थे। अच्छा खासा मजमा इकठ्ठा हो गया।
जाने कहाँ से सिटी केबल वाला टीवी कैमरामैन वहाँ पहुँच गया। उसने पूरे प्रकरण की फिल्म बना डाली। जब हम घर वापिस पहुँचे तो सिटी केबल पर सुहैल भाई प्रसाद बाँटते नजर आ रहे थे। मेरी धर्मपत्नी पूरी खबर सुन चुकी थी। वह मुस्करा कर बोली, भाई साहिब, आप तो पूरे छुपे रूस्तम निकले, न अपनी शादी की खबर दी न लडक़ा होने की। सीधे बेटे के डॉक्टर बनने की खबर मिली है वह भी सिटी केबल से। सुहैल भाई मुस्करा कर बोले, भाभी आवश्यकता अविष्कार की जननी है, सो सबकुछ आनन-फानन में करना पड़ा।
मैं पाठकों को बतला दूं कि सुहैल भाई चिर कुंआरे हैं।
सिटी केबल पर खबरें खत्म हुई ही थीं कि सुहैल भाई ने टेलीफोन डायरेक्टरी उठाकर फोन करने शुरू कर दिए। बातचीत से लग रहा था कि वह अखबार वालों से बात कर रहे हैं।
हाँ साहब, ठंडी सडक़ पर दशकों से खड़े त्रिदेव भगवान के पेड़ को एक आला ऑफिसर की बेटी के कहने पर कटवाया जा रहा है। यह हमारी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना है, हम मर जाएंगे मगर पेड़ नहीं कटने देंगे आदि-आदि।
फिर उन्होंने कहीं और फोन मिलाया और बोले, आप कैसे महामंत्री हैं धार्मिक संगठन के। आपके शहर में ठंडी सडक़ पर खड़े त्रिदेव भगवान के पेड़ को कत्ल किया जा रहा है और आप चुप हैं।  जी हां जाकर देखिये। इस तरह लगभग बीस फोन करने के बाद सुहैल भाई ने मेरी पीठ पर धौल लगाया और बोले, देखता हूँ अब कौन हाथ लगाता है मेरे प्यार पेड़ को।
सुबह जब हम सैर को निकले तो अजब तमाशा था। पेड़ पर मौली बांधी जा रही थी। अनेक औरतें व कुछ आदमी नारियल दिये व प्रसाद लिए खड़े थे। कुछ दीये पहले ही जल रहे थे। सुहैल भाई ने भी वहाँ जाकर दण्डवत प्रणाम किया, त्रिदेव भगवान को। कुछ लोग जो उन्हें सिटी केबल पर देख चुके थे, उनसे बात करने लगे। उन्हें उनके बेटे के मेडिकल में एडमिशन पर बधाई देने लगे। सुहैल भाई हाथ जोडक़र पेड़ की तरफ  इशारा करके कह रहे थे, सब त्रिदेव भगवान की कृपा है भाई साहब। आप बड़े भाग्यशाली हैं, ऐसा चमत्कारी पेड़ मैंने तो सारी जिन्दगी में कहीं नहीं देखा। आपने देखा है?
उसी शाम को जब हम वहाँ पर दोबारा गए तो पाया कि लोग न केवल जोत लगा रहे हैं अपितु ऊँ जै त्रिदेव की आरती भी गा रहे थे। ढोल व मंजीरे भी पहुँच चुके थे। रात्रि को सिटी केबल पर त्रिदेव भगवान पर विशेष प्रोग्राम दिखा गया तथा दो-तीन नेशनल न्यूज चैनल्ज पर भी इस खबर की क्लिप दिखाई गई।
अब सुहैल भाई निश्चिंत थे कि पेड़ को कोई हाथ नहीं लगा पाएगा। आज एक साल बाद सुहैल भाई फिर मेरे पास ठहरे हैं। मैंने उन्हें बतलाया कि अब तो हर शाम त्रिदेव भगवान की आरती पूजा होती है तथा हर सोमवार को एवं एकादशी को तो मेला सा लग जाता है। कल एकादशी है, आपको दिखलाऊँगा चमत्कार।
सुहैल भाई हँसकर बोले, राजन, मुझे तो प्रकृति के एक सौहाद्र्रपूर्ण तजुर्बे की, जो नीम ने पीपल व बड़ को अपने भीतर स्थान देकर कर दिखाया है, रक्षा करनी थी। सो मेरा कार्य पूरा हो गया, मुझे इसका सन्तोष है, पर अब मैं वहाँ पर नहीं जाउँगा। मुझे अपनी चालाकी पर स्वयं हँसी व शर्म आ रही है।
तभी मेरी धर्मपत्नी ने टहोका, भाई साहब हमारे डॉक्टर भतीजे के ब्याह में तो हमें बुलाएंगे न। सुहैल भाई हंस कर बोले भाभी अब इस बूढ़े पठान से कौन दोशीजा निकाह रचाएगी।