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Friday 24 Nov 2017

युद्ध


महेन्द्र नारायण पंकज
सम्पर्क:- ग्रामपोस्ट भतनी वाया-कुमारखंड (मधेपुरा) बिहार - 852128
मो. 9470289807
कम्युनिस्ट पार्टी का जिला सेक्रेटी रामप्रसाद मंडल अररिया आश्रम रोड के किनारे पार्टी ऑफिस में रहता है। एक रात वह देहात से इतने मजदूर ले आया कि भूरूकवा उगते-उगते घर बनवाकर पूरा कर लिया और आगे में हंसिया-हथौड़ा निशानवाला लाल झंडा गाड़ दिया। गेटनुमा बांस में एक टीन का बोर्ड टांग दिया, जिस पर लिखा था -‘‘कम्युनिस्ट पार्टी जिला कमेटी अररिया।’’
    ऑफिस में रोज दस बजे दिन से कामरेडों की भीड़ लग जाती। किसी कामरेड को सिकमी बटाईदारी केस में पैरवी करानी है, तो किसी को खूनी केस की। जब से आफिस बना है, कामरेड रामप्रसाद पैरवी के कार्य में उलझा रहता है, जिससे पार्टी का संगठन कार्य ठप्प -सा हो गया है।
    एक दिन आफिस में जिला कमेटी की बैठक चल रही थी। बैठक में पार्टी के राज्य सचिव आए थे। जिला कमेटी सदस्य ढोढाय यादव राम प्रसाद पर बरस पड़े थे। आंखें लाल पीली करते हुए पार्टी राज्य सचिव से कहने लगे थे- ‘‘कामरेड राज्य सचिव जी आप तो पटना पार्टी ऑफिस से आए हैं। क्या जान गए आप यहां के पार्टी संगठन की बात? इतने दिन से इस जिले में पार्टी है, लेकिन जिले के गांव-गांव, टोले-टोले में पार्टी फैल नहीं पायी है। जानते हैं क्या बात है, पूछिए न जिला सेक्रेट्री रामप्रसाद जी से? ऑफिस काहे न छोड़ते हैं? बैठे-बैठे रसगुल्ला चाभते हैं इसी से फैलेगी? जब तक आफिस नहीं छोड़ेंगे जिला सेक्रेट्री जी, तब तक किसान, मजदूरों के बीच पार्टी नहीं बन पाएगी।’’
    कामरेड रामप्रसाद ने बीच में ही बोलना चाहा, तो ढोढाय रोकते हुए बोले, चुप रहिए आप बहुत मक्कार हैं। मक्कार ही नहीं आप पार्टी विरोधी लोग हैं। आपको जब बोलने दिया जाएगा तब आप बोलिएगा, अभी मेरी पारी है। मैंने बड़ी मेहनत से इस जिले में पार्टी बनाई है। आप सबको चट करते जा रहे हैं। पूछिये कमरेड सबसे, बात सच है कि झूठ । कामरेड राम प्रसाद जी आप ऑफिसबाजी छोडि़ए नहीं तो जिला सेक्रेटरी से हटिए। दोनों में से कोनो एक काम करना होगा नहीं तो हम रिजिनेशन दे देंगे जिला कमेटी में। अब हमको नहीं बोलना है। अब जिस कामरेड को बोलना है बोले।’’
    कामरेड ढोढाय यादव का बोलना जैसे ही खत्म हुआ कि जीरा देवी बोलने लगी, ‘‘कामरेड ढोढाय ने जो इल्जाम जिला सेक्रेटरी पर लगाया है, सब सही है। जब से राम प्रसाद जी जिला सेक्रेटरी हुए हैं, तब से पार्टी लेवी, चन्दा-चि_ा के अलावे इन्हें कुछ भी नहीं सूझ रहा है। इन्होंने तो एक काम किया है कि अपनी पुश्तैनी दुश्मनी तेतर मंडल से साधने के लिए पांच सौ लोगों के साथ उसके घर को घेर लिया। तेतर मंडल डर के नुका गया, तो कामरेड जिला सेक्रेटरी जी ने घर का किवाड़ ताडक़र तेतर मंडल को निकाल लिया और उनके दरवाजे पर ही उन्हें इतना पीटा कि बेचारा अधमरू हो गया। इस तरह कामरेड राम प्रसाद जी ने अपने निजी स्वार्थ में पार्टी का इस्तेमाल किया है। इस बात को जिले के कौन कामरेड हैं, जो नहीं जानते हैं?’’
    साथी अध्यक्ष जी हमको भी बोलने दिया जाय। कामरेड राम प्रसाद ने मुंह लटकाते हुए कहा। ‘‘ठहरिये जिला कमेटी की बैठक चल रही है, साधारण बात नहीं है, जीरा दीदी का बोलना खत्म होगा, उसके बाद किसी दूसरे साथी को बोलने दिया जाएगा।’’ अध्यक्ष ने राम प्रसाद जी को समझाते हुए कहा।
‘‘अब क्या बोलूंगी? इस तरह बीच में ही उपर चढ़ होना ठीक बात है अब मुझे नहीं बोलना है।’’ जीरा देवी ने मुँह बिदका कर कहा।
    जीरा देवी का बोलना बन्द हुआ कि धिनाय मुसहर बोलने लगा, ‘‘कामरेड अध्यक्ष जी हम भी कुछ बोलेंगे।’’
    अध्यक्ष के आदेश से काला कलूटा मोटा शरीरवाला धिनाय मुसहर बोलने लगा, ‘‘सोनापुर के कामरेड गंगोत जमींदार की पचास बीघा जमीन पर गोली बन्दूक से कब्जा कर लिया और अपने हर फार से चिकना बुन दिया। चिकना फल-फूल गया, तो कामरेड रामप्रसाद का भाई अपनी भैंस से दोपहर रात में चिकना चुराते पकड़ लिया तो खेत में ही काफी पीटा। भाई की पिटाई होने पर जिला सिकरेटरी जी को दरद क्यों होने लगा? जबकि इन्होंने ही मीटिंग में ऐलान किया था कि जो भी भैंसवार चिकना चुराते हुए पकड़ा जाय उसको पहले पीट दीजिए चाहे मेरा भाई ही क्यों न हो? तब मेरे पास आइए। देख लेंगे चिकना चुराने वाले को। जब उनके भाई को बटाईदार कामरेड सब पीट दिया तो हमारे सेक्रेटरी जी बटाईदार पर आंख पीली करने लगे। गरज कर कहने लगे कि हमारे भाई को काहे मारे आप लोग? भैंस को थाना काहे ले जा रहे थे? उसी दिन से जिला सेक्रेटरी जी बटाईदारों से कतराने लगे और पैंतरा देने लगे कि जनता को अपनी लड़ाई स्वयं लडऩी होगी।’’ यह कह कर कामरेड जिला सेक्रेटरी जी फारबिसगंज अनुमंडल पार्टी ऑफिस में पेटकुनिया पार कर सो गये।
‘‘नेता बिना बटाईदार कामरेड सब बिलल्ला हो गये। अपनी औरत का जेबर बन्धक लगाकर बी. टी. एक्ट मुकदमा लड़ते रहे। लेकिन जिला सेक्रेटरी जी घूर कर ताकने नहीं आए। पूछिए इनसे वहां की जनता हमारी पार्टी क्यों छोड़ चुकी है? पार्टी के नाम पर उस इलाके में गरीब मजदूर ठीक उसी तरह भडक़ उठते हैं, जिस तरह हाथी घोड़ा देखकर भडक़ उठता है। हम को तो यह भी मालूम है कि जमींदार से जिला सेक्रेटरी जी पांच मन...।’’
बीच में ही जिला सेक्रेटरी राम प्रसाद धिनाय को टोकते हुए कहा, ‘‘क्या पांच मन...।’’
कामरेड राम प्रसाद द्वारा इस तरह टोका टोकी करने पर धिनाय को बहुत गुस्सा उठा। वह गरज कर कहने लगा, ‘‘क्या यह झूठ है कि जमींदार से पांच मन... धान...। कामनिस्ट पार्टी का नेता ही घूस-खोर और जमींदार का दलाल हो जाय तो पार्टी का क्या हाल होगा? कामरेड राज्य मन्तरी जी जाँच करवाइए और ऐसे भ्रष्ट दलाल लोगों को पार्टी से बाहर कीजिए। तब ही पार्टी की इज्जत बचेगी, नहीं तो...।’’
कामरेड धिनाय के बाद कामरेड भुटाय की बारी आई तो वे आँधी तूफान की तरह बोलने लगे,‘‘कामरेड राज्य मन्तरी जी सुनिये, हम माक्र्सवाद, लेनिनवाद, माओवाद सब पढ़े हैं। पटना राजेन्द्र नगर पार्टी आफिस स्कूल में माक्र्सवाद का जो ककहरा बताया गया था, वह सब मेरी कापी में अभी भी नोट है। निकालकर अभी दिखा देंगे, क्या बूझते हैं, हमको? कामरेड राम प्रसाद जी जब से जिला सिकरेटरी हुए हैं, तब से बहुत सफलता पाए हैं। मुरियारी बटाईदार कामरेडों को मुकदमा में जीत इन्हीं के कठिन परिश्रम का फल है। अभी कोई इन्हें गलत कह दे। गरीब मजदूर के सवाल को हमेशा से उठाते रहे हैं। इसी कारण जमींदार सामन्तों ने इन्हें पुलिस लगवाकर इतनी मार दिलवायी थी कि लीदी गिरने लगी थी। उस बेचारे पर झूठमूठ का इलजाम लगा कर जलील करना कहां तक उचित है। लाल झंडा की कसम खाकर कह रहा हूं राज्य मन्तरी जी! छि: छि: अन्हेर हो रहा है। एक जुझारू कामरेड पर अपना ही कामरेड हमला करे। बेचारे की आंख से लोर चू रहा है और कमेटी के सदस्य उनसे युद्ध करने में लग गये हैं।
अध्यक्ष के आदेश से कामरेड राम प्रसाद बोलने लगे, कामरेड राज्य मंत्री जी! जिन सदस्यों ने मुझ पर इलजाम लगाया है, उनसे पूछा जाय कि पोटिया के नामी जमींदार तुरंती यादव की जमीन पर मुरियारी आदिवासी बटाईदारों को कोर्ट से डिग्री किसने दिलवायी। शेखपूरा के बदिया जमींदार नथुनी सिंह की जमीन पर बटाईदार किसानों को कब्जा किसने दिलवाया। किसने किसान मजदूरों की समस्याओं को लेकर पर्चा निकाला। धरना और जुलूस का आयोजन किसने किया? किसके कारण भरगामा थाने की पुलिस ने बेरहमी से मुझ पर डंडे चलााये? कामरेड ढोढाय और जीरा दीदी से पूछा जाय कि यह सब बात गलत है क्या? आवेश में  बोलते रहने से राम प्रसाद का चेहरा लाल हो गया था।
भरगामा हाट पर पोस्टर सट गया है गली-गली में! पोस्टर में छपा है- ‘‘राज सिंहासन डावाडोल, बोल मजूरा हल्ला बोल -23 मार्च को पटना गांधी मैदान में बिहार के चर्चित घोटाले-चारा घोटाले, दवा घोटाले, अलतरा घोटाले, जमीन घोटाले, बन घोटाने, ओडिट घोटाले के विरोध में विशाल जुलूस में भाग लेकर बेईमानों के राज को खत्म करने के लिए आंदोलन करें।
निवेदक- कम्युनिस्ट पार्टी बिहार राज्य कमेटी।
हाट में काफी भीड़ थी। लोगों की रेल-पेल के बीच में ढोलवाला चमरू राम ढोल पीट रहा था - ढम-ढम ......ढम..... ढनाक।
एक आदमी ने कहा, ‘‘ऐ भाई कौन चीज का ढोलहा दे रहे हैं?
‘‘हम नहीं कहेंगे कौन चीज का ढोलहा है? कितना हम करेंगे ? हम को तो रोजाना हाट मेें ढोल पीटना पड़ता है। बोलते-बोलते गला बझ गया है। साथ में नेता जी हैं पूछ न लीजिए ।’’ मुंह बिदका कर चमरू ने कहा।
तब तक आवाज को राम प्रसाद जी ने सुन लिया, तो उन्होंने कहना शुरू किया, ‘‘23 मार्च को पटना गांधी मैदान में होने वाली विशाल रैली में भाग लेने के लिए पटना चलें ।’’
दूसरे आदमी ने कहा, ‘‘काहे पटना चलेंगे। साले सब नेतवन सब चोर हो गए हैं और हम लोगों को बेवकूफ बनाते हैं। पटना चलो तो दिल्ली चलो, कुर्सी पर जिस साले नेता को बैठाते हैं, सब साला खाकर बोच हो जाता है। नेतवन सब घोटाले पर घोटाले कर रहे हैं और हम जनता को बेवकूफ बनाने के लिए कोई रैली करेंगे तो कोई रैला? कौन नेता है, जो घोटालेबाज नहीं है? जो नहीं है वे पर्दे के पीछे हैं। वे भी पर्दे के सामने आ ही जाएंगे। ये साले सब जब घोटाले में पकड़े जाएंगे तो तोड़-फोड़ हम जनता से ही करवाएंगे। हम गरीबों से जमींदारों ने जमीन छीन ली है। सरकार ने जो मकान बनवा दिया है, वह भी बालू ही है। बिना घूस-घास के आफिस में कोई काम नहीं होता है। महंगाई आसमान चढ़ती जा रही है। जुलूस-फुलूस से कुछ होता है थोड़े ही। सब साला एक ही है।‘‘
तीसरे ने कहा, ‘‘क्या कह रहे हो भाई? कोमनिस्ट पार्टी ही एगो एसन है कि कोनो घोटाला फोटाला में नहीं है। तब एक दो ठो दागी तो ...।
सन्ध्या हो गई तो ढोलहा देकर चमरू घर चला गया। जाड़े का समय था। अररिया पार्टी आफिस के बरामदे पर बैठ कर कामरेड राम प्रसाद धूप ताप रहा था। सबेरे सबेरे तिलाय मंडल पार्टी आफिस पहुंचे तो कामरेड राम प्रसाद को देखकर बोले,- ‘‘कामरेड जिला सेक्रेटरी जी को लाल सलाम ।’’ लाल सलाम कामरेड तिलाय जी। भोरे-भोरे दिख रहे हैं। क्या करेंगे? जब से पटना जुलूस करके आये हैं, जी में चैन नहीं है। इधर फिर गांव में उकवा उठा है।  ‘‘कौन सा उकवा उठा है तिलाय जी ।‘‘ जिला सेकरेटरी उत्सुक होकर पूछने लगा।
‘‘हुआ यह कि रधुआ की मां रीता देवी जमींदार वसुनन्दन सिंह के खेत में घास काट रही थी कि जमींदार का बेटा चन्दन सिंह को न जाने कैसे मालूम हो गया? वह दौडक़र आया और  रीता देवी का झोंटा पकड़ कर लिरयाने लगा और दो चार तमाचा गाल में तरातर जमा दिया।’’
‘‘देखिए तो साला हरामी का बच्चा, मारा भी तो गाले में । साले को पकड़ कर काट काहे नय दिये।’’
‘‘रीता देवी का घरवाला  पंजाब में है। कोनो बात बिना आप से बूझे कैसे करते? पूरे गांव का खून तो गरम हो गया था, लेकिन कुछ भी करेंगे तो सोच समझ कर ही न।’’
कामरेड तिलाय की बात सुनकर जिला सेक्रेटरी चुप हो गया।
जाड़े की ठंडी हवा शरीर को बर्फ की तरह गला रही थी।। सन्ध्या होने को थी। तिलाय मंडल कामरेड रामप्रसाद को साथ लेकर गांव आये । पार्टी के जिला सेक्रेटरी के आने की बात गांव में कानों कान फैल गई। गांव के बीच में सिकंदर मंडल का घर है। कामरेड तिलाय टोले के कामरेड को उन्हीं के गोहाल में जमा करने लगे। गांव के लोगों में आक्रोश की आग धधक रही थी। इसलिए भयंकर ठंड में भी लोगों को ठंड का जरा भी अनुभव नहीं हो रहा था। कामरेड तिलाय को दम मारने की फुर्सत नहीं थी। वह कभी चमार टोली तो कभी जोलहा टोली का चक्कर लगा रहा था। लोगों के आने का सिलसिला जारी था। कुछ लोग कामरेड सिकन्दर के दरवाजे पर घूरे के पास बैठ कर आग तापने लगे। रात के अंधेरे में कुहासा को चीरती हुई कामरेड जीरा देवी भी शेखपुरा के एक कामरेड के साथ आ गई। कामरेड तिलाय की नजर जब जीरा देवी पर पड़ी तो वह कहने लगा ... ‘‘कामरेड जीरा देवी आप भी आ गयी है। ’’
जीरा देवी कामरेड तिलाय की बात सुनकर बोल उठी। तब मैं क्या करती , कामरेड? हमारी बहन कामरेड रीता देवी को जमींदार ने मारा-पीटा और हम चुप -चाप बैठ जाते ? यही हैं हमारा धरम ? आप लोग डरिये नहीं मूठीभिड़ान किये रहिए । साले जुल्मी जमींदार को काटा जाएगा , तब साला सब ठंडा होगा। ’’
शरीर को दलका देने वाली पूरवा हवा बहने लगी थी । कुहासा छा जाने से रात्रि की भयंकरता बढ़ गयी थी। कामरेड सिकंदर जी के गोहाल मे मीटिंग शुरू हुई। कामरेड तिलाय ने रीता देवी द्वारा सारी घटना का बयान करवाया। उपस्थित कामरेडों ने रीता देवी के बयान का समर्थन करते हुए कहा- कामरेड जिला सेेक्रेटरी जी आप भले आ गये हैं। साला जमींदारवा सब हम लोगों को बहुत सता रहा है। इस बार हम लोगों से पल्ला पड़ेगा। जो हो जाए। रीता देवी का बदला लेके रहेंगे। इस बार अमीर गरीब में युद्ध होकर रहेगा। आप हुकुम दीजिए तो साले जुल्मी लोगों को जहाँ पकरेगें वही मार कर हालत बिगाड़ देंगे । ’’
ठहरिये हल्ला नहीं कीजिये आप लोग। एक बात बताइए कि सिकमी बटाईवाला मुकदमा हार गए तो पार्टी क्यों छोड़ दी आप लोगों ने। पार्टी छोड़ देने से ही दुश्मन का मनोबल बढ़ा है। हमारी लड़ाई जमीन कब्जा करने तक ही सीमित नहीं है। बल्कि सड़ी -गली सामाजिक व्यवस्था को भी बदलना चाहते हैं। इतने क्लास चलवाए इस गाँव में लेकिन आप लोग कम्युनिस्ट नहीं बन सके। छोटी-मोटी बातों में लड़ बैठते हैं और आपस में लडक़र अपनी शक्ति कमजोर कर लेते हैं। हम क्या नहीं जानते है इस टोले का? सिकन्दर अपने भाई से जमीन के बँटवारे को लेकर अररिया कोर्ट में केस लड़ रहा हैं उत्तरी टोले के नकछेदी मंडल अपने पड़ोसी कपिल देव मंडल से खून-खराबा करके मुकदमा लड़ रहा है। इस तरह आप लोग आपस में लड़ते रहिएगा तो जमींदार एक-एक कर सबको बर्बाद कर देगा। इसलिए सभी मुकदमा खत्म कर लीजिए और एक बन जाइए। सभी गरीब एक बनकर नहीं रहेंगे तो जुल्म के खिलाफ लड़ पाएँगे क्या? बोलिए आप क्या चाहते हैं?
मीटिंग में बैठे लोगों के दिमाग में बात घुस गई। लोगों ने एक स्वर से कहा- जिला सेक्रेटरी जी अब हम लोग सभी केस-मुकदमा मिलकर लड़ेंगे। और एक बनकर रहेंगे। बताइये रीता देवी पर जुल्म का बदला कैसे लिया जाय?
गाँव के लोगों में जोश देखकर कामरेड राम प्रसाद को भी जोश आ गया और बोलने लगे- ‘‘साथियों इज्जत से जीना चाहते हैं तो जुल्म के खिलाफ युद्ध की घोषणा करनी होगी । हमारी पार्टी का ऐलान है कि न जुल्म करो और न सहो । इसलिए हम लोग तैयारी करें और ताक में रहे कि जहाँ जुल्मी जमींदार वसुनन्दन सिंह मिले पकड़ कर देह तोड़ दीजिए। नहीं तो जमींदारो का जुल्म बढ़ता जाएगा। आज रीता देवी को पीटा है, तो कल हमारी बहन-बेटी की अस्मत भी लूट सकता है।’’
‘‘धत्त तेरे की, क्या बात बोल रहे हैं जिला सेक्रेटरी जी’’ मुंह टेढा कर डोमी मंडल बोल उठा।
‘‘चुप साला, जिला सेकरेटरी जी तो ठीक कह रहे हैं। तुम को अकिले नहीं हैं तो बुझोगे नार।’’ दुनाय दांत पीसते हुए बोला।
जिला सेक्रेटरी ने कुछ फुसफुसाहट सुन ली तो बोलने लगा। किसी कामरेड को कोई आपत्ति हो तो खुलासा बोलिये । बाद में नहीं कहियेगा कि आग लगा आया और आग लगा कर चला गया। ब्रांच सेकरेटरी बैजू मंडल तैश में आकर बोलने लगा, कौन मौगा धुन सुन-धुन सुन कर रहा है? मरद है कि मौगी? जरा सामने आकर बोलिये । बिना लड़े ये सामन्त जमींदार हम लोगों को इज्जत से जीने देगा क्या?
दुनाय खड़ा होकर बोलने लगा, ब्रांच सेक्रेटरी जी आप क्यों बिगडऩे लगे। गाम का कोई आदमी बगद जाय तो उसको संभालियेगा कि नहीं । जो भी हरख- विवाद मुँह से निकल ही गया तो आप बिगड़ क्यों रहे हैं। सब कोई मिलकर दुश्मन से बदला लेने का इन्तजाम कीजिए। अपनी ही रक्षा करने में किसी को आपत्ति क्यों होगी? जिला सेकरेटरी जी का सुझाव हम लोग मान गए सन्देह की बात ही क्या रही?
ब्रांच सेक्रेटरी बैजू मंडल मूड में आकर बोलने लगे- ठहरिये वैसे नहीं होगा। बाद में तू-तू मैं-मैं से अच्छा है कि सबसे हाथ उठवा लेते हैं। कमरेड जिला सेक्रेटरी जी के प्रस्ताव के समर्थन में हाथ उठाइए।
मीटिंग में बैठे लोगों ने हाथ उठाकर प्रस्ताव का समर्थन किया।
गांव में चारों-पांचों टोला के लोग एक हो गए। लाठी-भाला, गोली-बंदूक का इन्तजाम होने लगा। बाहर से भी कुछ लोग मंगाए गए। सब के जुबान पर एक ही बात बैठ गई- जीना है तो लडऩा सीखो। गांव आंधी तूफान की तरह आवेश में भर गया।
सुबह के कुहासे में कुछ लठैत के साथ वसुनन्दन सिंह खेत देखने आये थे। गंगोत टोला के सटे पूरब उनका खेत है। खुफिया की रिपोर्ट पर गांव के सैकड़ों लोग हथियार के साथ निकल आये और वसुनन्दन सिंह को चारों ओर से घेर लिया। जमींदार के लठैत सैकड़ों की संख्या में लोगों को देखकर भाग खड़े हुए। लेकिन वसुनन्दन सिंह भाग नहीं पाए। वे पकड़ लिए गये। लोगों ने घूसे-तमाचे लाठी-सौंटे से इतना पीटा कि वे बेहोश हो गए।
इस घटना के बाद बबुआन टोला भी गरम हो उठा। वसुनन्दन सिंह अपने घर में मार की पीड़ा से कुहर रहे थे। टोले के लोग उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़े। उनका बेटा चन्दन सिंह दरवाजे पर कूद-फांद कर कह रहा था। साले रार चोहार गंगोत, कीयट, धानुक, जोलहा, मुसहर सबको भकसी झोंक देंगे, छोड़ेंगे नहीं। सब सालों को पेट्रोल छिडक़ कर घर में ही जला देंगे। समझ क्या लिया है दोगलों के बच्चों ने?
भीड़ में से केवल सिंह मुंह बिचका कर बोल उठा- ‘‘बाबू चन्दन सिंह, इस सब साले जोलाहे धानुक गंगोत को बुद्धि कहाँ से आई कि हम लोगों से लड़ेगा? जब से उस गांव में रामप्रसाद ने कम्युनिस्ट पार्टी बनायी है, तभी से सब साले रार सब का मन बढ़ गया है। गरीब गुरूवा को सनका कर हम लोगों से युद्ध करवाता है। उसी साले को पकडिय़े और बान्ह कर मरम्मत कीजिए। तभी इस समस्या का परमानेन्टली इलाज हो सकेगा। बीमारी है कहीं और इलाज करना चाहते हैं कहीं?’’
भीड़ में बुच्चन सिंह को भी नहीं रहा गया। वह भी गरजने लगा -‘‘क्या कहते हो बिना सबक सिखए रार रोहियार साले ठामापर नहीं आएंगे। तब वे तो ऐसे ही  बराबरी करते रहेंगे। सब साले सामाजिक न्याय का मन्तर जप रहे हैं।’’
वसुनन्दन सिंह के दरवाजे पर गरमा गरम बहस छिड़ गई। गांव के बुजुर्ग रामधारी सिंह ने लोगों को शान्त करते हुए कहा -देखो लंठ की तरह बात मत करो। हम लोग यहां पर कम संख्या में हैं। चारों ओर पिछड़ों की बस्ती है। कुछ ज्यादा खुराफात करोगे तो और अधिक काण्ड बढ़ जाएगा। तुम लोगों को पता है कि नहीं, पूर्णिया जिले के सिरसिया गांव के बबुआनों की बस्ती को हजारों पिछड़े लोगों ने घेर कर जला डाला। सिरसिया के बाबू लोगों की कोई इज्जत बाकी रही? कुछ करना चाहते हो तो थाना के दरोगा जी को मिला कर सब साले को फंसाओ और पुलिस के द्वारा डंडा करवाओ।
उपस्थित लोगों ने रामधारी सिंह की बातों का समर्थन किया और वसुनंदन सिंह का पुत्र चन्दन सिंह भी मुकदमा द्वारा ही बदला लेने के विचार से सहमत हो गया।
सोनपुर गांव में पुलिस द्वारा जुल्म ढाये जाने और निर्दोष लोगों के साथ भी मारपीट किये जाने के विरोध में कामरेड राम प्रसाद मंडल भरगामा हाट पर पर्चा बंटवा रहा था कि जमींदार के आदमी ने थाना जाकर दारोगा को खबर कर दी। जमींदार के हाथ बिका हुआ दारोगा गंगा राम सिंह जीप से आ धमका और रामप्रसाद से पूछने लगा- ‘‘नेता जी क्या बात है, पर्चा बंटवा रहे हैं?’’
कामरेड राम प्रसाद दारोगा की बात सुनकर आवेश में आ गये। उनका चेहरा तमतमा उठा। वह गरज कर बोलने लगा,-‘‘देखते नहीं हो दारोगा, तुम्हारे कारनामे का चि_ा छपवाकर बँटवा रहा हूँ।  जमींदार के हाथों बिककर निर्दोष निर्धन जनता पर जुल्म ढाहते हो, शर्म नहीं आती है तुम्हें। जनता का नौकर होकर जनता पर ही जुल्म ढाहते हो। तुम्हारा यह जुल्म नहीं चलेगा।’’
दारोगा गंगाराम सिंह भी तैश में आ गया। उसका चेहरा लाल हो गया। वह बहुत जोर से गरजा, ‘‘कौन है रे मा.. चौ............तोरा मैया के...... बन्द करो पर्चा बाँटना। नहीं तो.......।’’
‘‘नहीं तो माने क्या हुआ? मैं तुम्हारा नौकर हूँ क्या? मैं आजाद देश का रहने वाला हूँ। पर्चा बांटने का अधिकार है मुझे। मैं पर्चा बांटूंगा ही क्या कर लोगे तुम?’’ कामरेड सज्जन अकड़ कर बोला।
दरोगा को सज्जन की बात मिरचाई की तरह लग गई थी। वह तिलमिलाता हुआ आया और कामरेड सज्जन के मुंह पर धराधर थप्पड़ जमाते हुए बाल पकड़ कर घसीटने लगा।
सामने ही पान की दुकान पर जिला सेक्रेटरी रामप्रसाद मंडल खड़ा था। उसने जैसे ही देखा कि दरोगा सज्जन को बाल पकड़ कर घसीट रहा है तो उससे भी नहीं रहा गया। उसका भी क्रोध भडक़ उठा। वह गरज उठा ‘‘ए दरोगा छोड़ते हो या नहीं कामरेड सज्जन को। कोई चोर बदमाश तो नहीं है।’’
रामप्रसाद की बात सुनकर दरोगा और उत्तेजित हो गया और सज्जन की पिटाई करने लगा। कामरेड सज्जन हन्टर की हर चोट पर चीख उठता: बाप रे... माय गे... । कामरेड जिला सेक्रेटरी जी....ई....ई....ई...ओ...ओ।
अपने साथी को पीटते देख राम प्रसाद मंडल जी भी उत्तेजित हो गया। वह दरोगा के पास गया और उसे उठा कर पटक दिया दिया और उसके मुँह पर तड़ातड़ तमाचा लगाने लगा। इसी उठापटक में सज्जन को मौका मिल गया, वह किसी तरह भाग निकला।
मोटा-ताजा, लम्बा शरीर, पतली मूँछ, लम्बे-लम्बे बालों एवं बड़ी-बड़ी आँखों वाला काला-कलूटा कामरेड राम प्रसाद दारोगा की गर्दन मरोड़ कर जीप में घुसाने लगा कि पीछे से पुलिस आई और उसपर डंडे बरसाने लगी।
कामरेड राम प्रसाद पर डंडे बरसाते देख कर कामरेड सूचित शर्मा का खून गरम हो गया। वह गरज कर बोला: ‘‘रे खाकीवर्दी वाला खबरदार हमारे नेता पर लाठी चलायी तो हालत बिगाड़ दूँगा।’’
सूचित शर्मा अपने नेता को बचाने के लिए दौड़ पड़ा और वह पुलिस के पैर में सटासट लाठी मारने लगा। सट....सट......सटाक की आवाज सुनकर आसपास के लोग इक_े होने लगे।
दरोगा चोट खाए सर्प की तरह फुफकार उठा। उसने पुलिस की मदद से कामरेड रामप्रसाद को कब्जे में लेकर जीप में घुसा दिया। पुलिस द्वारा धर पकड़ का काम शुरू हो गया। पुलिस जिसके हाथ में लाठी देखती उसे गिरफ्तार कर लेती थी। भीड़ में भगदड़ मच गई। लोग जहाँ तहाँ भागने लगे।
दरोगा गिरफ्तार लोगों को थाना लाया। रात्रि के अंधकार में दरोगा के हन्टर गिरफ्तार लोगों पर पडऩे लगे। सट....सट....सटाक की आवाज के साथ हन्टर लगातार बरसते रहे। चीख पुकार.....माय.....गे.....बाप हो के दर्द भरे शब्द अंधकार को चीरकर अड़ोस-पड़ोस के लोगों के दिल को दहलाने लगे थे।
शाम में ही यह बात सोनपुर गाँव के कम्युनिस्ट पार्टी के लोगों तक कानोंकान चली गयीं। गांव के पार्टी सेकरेटरी बैजू मंडल अगिया बैताल हो उठा वह प्रेमी मंडल, रामदेव मंडल, किसुन शर्मा, सोहन मंडल, जयनारायण मंडल, अयोधी शर्मा, टुनाय ऋषिदेव,को बुलाकर कहने लगा, ‘‘कामरेड आप लोगों का खून क्यों नहीं गरम हो रहा है। जाइए और टोले के साथी कामरेड को बुला लाये।’’
देखते ही देखते सिकंदर मंडल के दरवाजे पर बहुत से लोग इक_े हो गए। जीरा देवी भी धानुक टोले से आकर लोगों को ललकारने लगी- ‘‘आप लोग काहे के लिए मरद हुए हैं, साड़ी पहनकर घर में सो जाइए जिला सेक्रेटरी जी को मार लग गई है और आप लोग चुप हैं।’’
जीरा देवी की बात सुनकर टुनाय गरज उठा- ‘‘क्या सब बोल रही है कामरेड जीरा दीदी । हुकुम दीजिए लंका जरा देंगे हनुमान की तरह। साले खाकी वर्दीवाले को मजा चखा देंगे, क्या समझ रखा है घुसखोरवा? काहे मारा हमारे जिला सेकरेटरी जी को, चोर-डकैत लुच्चा-लफंगा, घरढूक्का को घेर कर क्यों नहीं पकड़ता है? इन्सान लोगों को बान्हते फिरता है। हम लोग उसका मुंह कूचेंगे छोड़ेंगे नहीं।
शर्मा टोला की सीटी देवी से रहा नहीं गया। वह भी आवेश में आकर बोलने लगी, बरान्च सेक्रेटरी जी, आप क्यों उदास हैं? जरा आगे होकर देह तानिए तो। मैं अकेली ही साले दरोगा को मार चप्पल के दिमाग ठंडा कर दूंगी।’’
‘‘थमिये-थमिये बड़ा अन्हेर हो जाएगा, हम लोगों के रहते सीटी देवी दारोगा को मारेगी तो हम लोगों की नाक कटेगी कि नहीं। जात-बेरादर सब थू-थू करेगा और कहेगा और कहेगा कि आप लोग डूब मरिये चुलू भर पानी में।’’ बाल किसुन शर्मा ने दाँत निपोरते हुए कहा।
‘‘हो हल्ला मत कीजिए कामरेड। एक बात सुनिये, कल बारह बजे भरगामा थाने का घेराव करना है। सभी टोले से तीर भाला, लाठी, गड़ासा से लैस होकर झंडा बैनर के साथ, हाई स्कूल के मैदान में जमा होना है। हम लोग थाना जाकर जिला सेक्रेटरी जी के साथ-साथ सभी साथी को छुड़ा लेंगे। किसी को आपत्ति।’’ ब्रांच सेक्रेटरी बैजू मंडल ने कहा।
‘‘धत्ततेरे की आप भी क्या कहते हैं ब्रांच सेकरेटरी जी। हम लोगों का साथी थाना में बन्द है और हम लोग आपत्ति करें, क्यों? आप भी बिना मगजवाला गप करने लगते हैं।’’ दुनाय शर्मा मुंह बिदका कर बोला।
ब्रान्च सेक्रेटरी बैजू मंडल ने कहा -‘‘जो निर्णय होना था, वह तो सर्व सम्मति से हो गया। अब आप लोग अपने अपने घर जाकर जुलूस की तैयारी में लग जाएगा।’’
मीटिंग समाप्त होते ही सभी लोग अपने-अपने घर चले गए।
भरगामा हाई स्कूल में टोले-मोहल्ले से गगन भेदी नारों के साथ लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पाँच हजार लोगों का जुलूस थाने की ओर बढ़ा। नारे लग रहे थे।
तानाशाही नहीं चलेगी
पुलिस जुल्म बन्द करो
कामरेडों को रिहा करो।
रीता देवी के ऊपर जुल्म करने वाले जुल्मी जमींदार को गिरफ्तार करो।
दारोगा गंगाराम सिंह भीड़ देखकर जैसे ही थाने से बाहर आये कि जुलूस से किसी ने आवाज लगाई मारो साले घुसखोर दारोगा को। मगज फाड़ दो साले को। ई साला पैसे वाले की ही तरफदारी करता है।
 दूसरे ने नारा लगाना शुरू किया- जोर जुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है।
तीसरे ने कहा: देखते हो क्यों ? पकड़ो साले दरोगा गंगा राम सिंह को। हमारे जिला सेकरेटरी जी को काहे पीटा है गिरफ्तार करके?’’
    भीड़ उग्र हो गई पत्थराव शुरू हो गया। पुलिस ने हवाई फायरिंग की। धाँय.... धाँय..... धाँय.....! ठ्ठ