Monthly Magzine
Monday 19 Feb 2018

अमृतलाल नागर जन्मशती समारोह


उर्मिला शुक्ल

संस्कृति समाचार
छत्तीसगढ़ प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा अमृतलाल नागर जन्मशती पर उनकी रचनाओं पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  पं रवि शंकर विवि के कुलपति डॉ शिव कुमार पांडेय थे। संगोष्ठी के पहले सत्र  की अध्यक्षता  प्रो त्रिभुवन पांडेय ने की। सम्मेलन के अध्यक्ष ललित सुरजन ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा छत्तीसगढ़ प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन ने पहले भी साहित्यकारों की जन्म शताब्दियों पर कार्यक्रम आयोजित किये हैं। इसी क्रम में आज  नागर जी पर ये संगोष्ठी आयोजित है। हमारा उद्देश्य अपने पूर्वज साहित्यकरों को याद करने के साथ साथ युवा वर्ग को साहित्य से जोडऩा भी है। इस सत्र में दुर्गा महाविद्यालय रायपुर एवं पं  रवि शंकर विवि के छात्र कौशिक विस, लुनेश, वासुदेव निषाद ने अमृत लाल नागर की रचनाओं -जंतर मंतर ,माँ बाप और बच्चे , नजीर मियां और मानस का हंस (सार ) का पाठ किया । अमृत लाल नागर की कहानियों पर डॉ उषा बैरागकर आठले ने अपना सारगर्भित आलेख प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि डॉ पांडेय ने उनके आत्म कथात्मक आलेखों के अंश उद्धृत करते हुए उनके व्यक्तित्व के विविध पहलुओं को रेखांकित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रोशनी मिश्रा ने किया।
 दूसरा सत्र अमृतलाल नागर के उपन्यासों पर केंद्रित था। इस सत्र के प्रमुख वक्ता प्रो सूरज पालीवाल ने नागर जी के जीवन और उपन्यासों के प्रकाश डालते हुए कहा - नागर जी धारा के विरुद्ध तैरने वाले साहित्यकार थे। उनका मानना था कि साहित्यकार संघर्षों से जूझकर ही सार्थक रच सकता है और वे जीवन भर संघर्ष ही करते रहे। वे एक समर्पित रचनाकार थे। वे अपने जीवन में भी उसी रास्ते पर चले जो बूँद और समुद्र की ओर ले गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ गोरेलाल चंदेल ने कहा नागर जी की रचनाओं में उनका समय अपनी तमाम विशेषताओं के साथ उपस्थित है। चाहे वो उनका अमृत और विष या खंजन नयन। इन दोनों उपन्यासों में वे अपने समय की समस्यायों  को लाने की कोशिश करते हैं और ये समस्यायें राजनीति केंद्रित हैं। इसीलिये  वे मानते थे कि लोकतंत्र के बाद पूँजीवाद आयेगा और उसके बाद समाजवाद आएगा ही। और हम देख रहे हैं कि आज पूँजीवाद हर ओर नजर आ रहा है। अतएव  आज के समय में अमृतलाल नागर प्रासंगिक हैं।  कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के साहित्यकार विनोद साव, संतोष झांझी, रमेश शर्मा, वेद प्रकाश अग्रवाल आदि उपस्थित थे। संचालन डाली पांडेय ने किया। सम्मेलन के महामंत्री रवि श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
     रायपुर (छत्तीसगढ़)