Monthly Magzine
Monday 18 Feb 2019

चिडिय़ा का डर

अशोक गुजराती
बी-40, एफ़-1, दिलशाद कालोनी, दिल्ली- 110 095
मो. 09971744164
चिडिय़ा का डर

कोयल के अण्डे चुराकर
निश्चिंत निद्र्वन्द्व घूम रहा कौवा

सहमी हुई है चिडिय़ा
उसके संस्कार है वैसे
वह जरा-जरा-सी बातों में
दुखी हो जाती है
प्रसन्न हो लेती है
चिन्तित हो जाती है
उसे नहीं पता
वह क्यों है डरी हुई
जबकि है निर्दोष-निरपराध
वह तो इतनी-सी बात से है विचलित
कि कहीं कोई
उस पर शक न कर ले
आक्रमण का न सोच ले
चुल्लू भर पानी में डूब मरने की
शर्मनाक घटना होगी उसके लिए यह
जगत के सारे पशु-पक्षियों का
उठ जाएगा उसकी जाति पर से विश्वास
उसकी मासूमियत हो जाएगी बदनाम
शायद अच्छाई पर से ही
लोगों का यकीन उठ जाए
क्या करे वह?

क्या कोयल को सब कुछ बता दे सच-सच...
उसका अपराध है सिर्फ इतना
कि वह उसी पेड़ की उसी डाल पर रहती है
कौवे से भी हंस-बोल लेती है
कोयल की मीठी लय में झूमती है...
लेकिन नहीं, खुद कोयल के पास जाने से
कहीं उसका शुबहा और बढ़ गया तो?
वह क्या करे?

सहमी-विचलित है वहमी चिडिय़ा
निश्चिन्त निद्र्वन्द्व घूम रहा कौवा...