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Tuesday 21 Nov 2017

नयी सदी के नवगीत का लोकार्पण

 

 संस्कृति समाचार
प्रख्यात नवगीतकार डाक्टर ओमप्रकाश सिंह द्वारा संपादित और नमन प्रकाशन दिल्ली द्वारा प्रकाशित चुनिन्दा नवगीतकारों के प्रतिनिधि नवगीतों के संकलन नयी सदी के नवगीत के तीनों खण्डों का लोकार्पण 4 जुलाई को उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ में संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ गीतकार डाक्टर उदयप्रताप सिंह, वरिष्ठ आलोचक और लखनऊ विवि के भूतपूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. सूर्यप्रसाद दीक्षित, प्रख्यात नवगीतकार डा. माहेश्वर तिवारी तथा गुलाबसिंह, सुप्रसिद्ध नवगीतकार तथा समीक्षक डा. रामसनेही लाल शर्मा, कवयित्री डा. विद्याबिन्दु सिंह,  सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश के अपर निदेशक सुपरिचित नवगीतकार डा रविशंकर पाण्डेय के करकमलों से सम्पन्न हुआ। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में डा.उदयप्रताप सिंह ने लोकार्पित कृति को ऐतिहासिक बताया और डा.ओमप्रकाश सिंह को उनके श्रम तथा सम्पादनकौशल के लिए हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि हिन्दी साहित्य में गीत-नवगीत के शोधार्थियों के लिए यह संकलन मानक ग्रंथ सिद्ध होगा। मुख्य अतिथि डा.सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि तमाम विरोधों और अंतर्विरोधों के बावजूद नवगीत अगर आज हिन्दी कविता की मुख्य धारा में शामिल हो सका है तो इसलिए क्योंकि नवगीत हमारे समय के सवालों को पूरी ताकत और ईमानदारी के साथ उठाता रहा है। डा. रामसनेहीलाल शर्मा ने अपने मुख्य वक्तव्य में गीत और नवगीत के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि नवगीत परकाया प्रवेश के द्वारा समाज के दुख.दर्द को व्यक्त करता है, जबकि गीत रचना में वैयक्तिक अनुभूतियों को अभिव्यक्त किया जाता है। डा. माहेश्वर तिवारी ने निराला को नवगीत का प्रथम पुरुष और डा. शम्भूनाथ सिंह को इसका उन्नायक बताया और कहा कि डाक्टर ओमप्रकाश सिंह ने इस कार्य को और आगे बढ़ाया है।     - जय चक्रवर्ती