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Tuesday 21 Nov 2017

इतालवी कहानी : फॉन्टामारा (एक गांव की कहानी)


इग्नेजियो साइलोन
अनु. डॉ. परशुराम शुक्ल ‘विरही’
भारतीय विद्यालय मार्ग, देवीपुरम् शिवपुरी (म.प्र.)  
मो. 08989007999

जून के मध्य में यह समाचार फैल गया कि मार्सिका के किसानों को फ्यूसिनो के प्रश्न पर रोम सरकार का निर्णय सुनने के लिए ऐवेजानो बुलाया जाएगा। इस समाचार से बड़ी हलचल मच गई, क्योंकि फ्यूसिनो-प्रश्न जैसी कोई चीज है, इसके पूर्व कभी किसी सरकार ने यह स्वीकार किया हो, ऐसा किसी को याद नहीं; और चूंकि चुनाव समाप्त कर दिए गए थे, हमारे भू-भाग के कानूनदां भी उसका अस्तित्व भूल गए थे।
इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि रोम में एक नई सरकार है, क्योंकि समय-समय पर हम उसके बारे में सुनते थे। इससे इस बात की पुष्टि होती थी कि युद्ध हुआ था या होने वाला है; क्योंकि युद्ध ऐसी  वस्तु है जो किसी पुरानी सरकार को निकाल कर नई सरकार ला सकती है। हमारे प्रदेश में बोर्बोनो ने इसी प्रकार स्पेन के लोगों को स्थान च्युत किया था और पीडमोंट वालों ने बोर्बोनो को। परन्तु फॉन्टामारा में अभी तक किसी को पता नहीं था कि यह नई सरकार कहां से आई है और इसकी क्या राष्ट्रीयता है। सरकारों का बनाना-बिगडऩा तो शहरों में ही घटित होता है।
सरकार के परिवर्तन के समय किसान केवल इतना ही कह सकता है- ‘‘भगवान हमें अच्छी सरकार भेजे।’’ ठीक उसी तरह जैसे बादलों के बारे में बेचारा किसान ईश्वर की इच्छा पर निर्भर रहता है।
जो हो, यह बात महत्व की थी कि नई सरकार का एक प्रतिनिधि समानता के स्तर से दीन किसानों के साथ बात करके मामला तय करना चाहता था।
‘‘पुराना शासन फिर आने वाला है’’ जनरल बैल्डिसेरा कहता फिरता था। पुराने जमाने में आजकल की तरह राज भवन और किसान की झोपड़ी के बीच में बैरकों और सेना नायकों और उपनायकों का अगम जंगल नहीं था और वर्ष में एक बार शासक छद्म वेश धारण कर मेलों में जाकर दीन जनता के साथ मिलते-जुलते और उनके सुख-दुख की सुनते थे। इसके बाद चुनावों का आविर्भाव हुआ और उन्होंने शासकों और किसानों के बीच एक खाई खोद दी। किन्तु अब, यदि अफवाहें सत्य हैं तो, हम उस प्राचीन शासनकाल की ओर लौट रहे हैं, जिसे हमें कभी छोडऩा नहीं चाहिए था।
माइकेल जोम्पा भी ऐसी ही भावना रखता था। ‘‘निर्वाचनों पर आधारित सरकार सदा धनिकों द्वारा नियंत्रित होती है, क्योंकि वे ही निर्वाचनों को इच्छानुसार घुमा लेते हैं’’ उसने कहा। एकतंत्र वाली सरकार धनियों को भयभीत कर सकती है। राजा और किसान के बीच ईष्र्या या प्रतिद्वन्द्विता कैसी? यह विचार ही हास्यास्पद है परन्तु राजा और राजकुमार तोरलोनिया के बीच ईष्र्या हो सकती है।’’
बरार्डो को उसकी शेष लोगों की बात काटने की बुरी आदत से कौन रोक सकता था? फ्यूसिनो की भूमि के फिर से होने वाले बंटवारे में शायद उसे  भी एक भूखण्ड मिल जाए, इस आशा से वह बोला- ‘‘सरकारें सदा चोरों की होती है। निश्चय ही एक चोर पांच सौ की अपेक्षा अच्छा है। एक चोर, चाहे उसकी भूख कितनी ही बड़ी क्यों न हो, पांच सौ छोटे-छोटे भुखमरे चोरों की उपेक्षा कम ही हड़प पाता है। यदि वे फ्यूसिनो का पुन: विभाजन करने वाले हैं, तो फॉन्टामारा को भी अपने अधिकारों का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।’’
एक रविवार को सबेरे एक मोटर लारी फॉन्टामारा आई और चालक ने सब किसानों को बुलाकर कहा कि जो कोई ऐवेजानो चलना चाहे, उस लारी पर सवार हो जाए। इसके लिए कुछ देना नहीं पड़ेगा। लॉरी तिरंगे झण्डों से पूरी तरह सजी हुई थी।  अधिकारियों ने इसे भेजा था और यह बात बड़ी आश्चर्यजनक लगी कि उसके लिए कुछ देना नहीं था।
यह केवल संयोग की बात थी कि हममें से 10-12 लोग फॉन्टामारा में रह गए थे। शेष सब काम पर गए थे। चर्च ने हमें सदा ग्रीष्म में इतवार को काम करने की अनुमति दे रखी हैं, क्योंकि इस समय काम बहुत होता है। कटनी जून के प्रारंभ में होती है, यह जानकारी नई सरकार को नहीं थी, किन्तु हममें से एक ने भी नई सरकार को दोष नहीं दिया। नगर निवासियों की सरकार से इस जानकारी की आशा कैसे की जा सकती है कि यह कटनी का मौसम है? जो हो, हम उस सभा में भाग लेने के लिए बिलकुल राजी थे जिसमें फ्यूसिनो का प्रश्न तय होने वाला था।
हम फॉन्टामारा वालों का सदा से यह दावा रहा है कि हमें फ्यूसिनो के भूभाग पट्टे पर मिलने का अधिकार होना चाहिए। पर, तोरलोनिया प्रशासन ने ऐसा कभी नहीं होनेे दिया, उन्होंने वह भूमि डॉक्टरों, वकीलों, प्रोफेसरों और धनी क्षेत्रपतियों को देना अधिक पसंद किया, जो हमारे ही श्रम का उपयोग करते थे। तो भी फ्यूसिनो की कुछ भूमि पट्टे पर लेने की अपनी आशा हमने कभी त्यागी नहीं थी। हमारी एकमात्र आशा भूमि की इस प्रसिद्ध बेदखली की प्रतीक्षा में रही है, जिसके संबंध में डॉन सर्काेस्टेंजा बहुधा हमसे कहता रहा था, विशेषत: चुनावों के समय में।
‘‘फ्यूसिनो भूमि जोतने वालों के लिए’’ सर्कोस्टेंजा का नारा रहा था। वह कहता था कि फ्यूसिनो को राजकुमार तोरलानिया और धनी क्षत्रपों और शौकिया खेती करने वालों से लेकर उसके जोतने वालों को दे देना चाहिए। इसका अर्थ था किसानों को दे देना चाहिए। इसलिए इस खबर ने हम सबमें हलचल मचा दी कि फ्यूसिनो का बंटवारा होने वाला है। सरकार ने विशेष लारी भेजी जिससे कि फॉन्टामारा के किसान उस समारोह में भाग सकें। हममें से जो थोड़े से वहां थे, वे बिना कोई प्रश्न पूछे लारी में चढ़ गए। मेरे अतिरिक्त बरार्डोवायोला, अन्तोनिया जप्पा, त्योफिलो डेलाक्रोस, बाल्डोविओ स्कियारप्पा, सिम्पनीशिओ, ग्याकोब लेसार्डो, पोंजिया पिलातो और उसका लडक़ा, ऐंड्रिया कैपोटेल और रैफाइल स्कामोर्जा। परन्तु हमारे रवाना होने के पहले चालक ने पूछा- ‘‘तुम्हारे झंडे का क्या हुआ?’’
‘‘कैसा झण्डा।’’
‘‘मुझे निश्चित आदेश है कि किसानों के प्रत्येक दल के पास एक झण्डा होना चाहिए।’’ चालक ने कहा।
हम चाहते थे कि नई सरकार पर किसी प्रकार का बुरा प्रभाव न पड़े, विशेषत: उस समारोह के समय जिसमें फ्यूसिनो का प्रश्न हल होने वाला था। त्यौफिलो, जिसके पास गिरजे की चाबियां रहती थीं, ने सुझाया कि हम संत रोक्को का ध्वज ले चलें और हम सहमत हो गए। इसलिए उसे लेने वह रैफाइल स्कामोर्जा के साथ लेकर गिरजाघर गया। जब चालक ने उन्हें एक पन्द्रह फुट लम्बा बांस मुश्किल से लाते हुए देखा, जिसमें एक नीले और सफेद रंग का झण्डा था जिस पर संत का और उसके घाव को चाटते हुए कुत्ते का चित्र था, तो उसने कहा कि वह उसे अपनी लारी पर नहीं ले जाएगा। परन्तु फॉन्टामारा में हम लोगों के पास यही एक झंडा था और बरार्डो ने अपना पैर अड़ा दिया। इसलिए चालक मान गया और उसी झण्डे को ले जाने के लिए राजी हो गया।
यह बड़ा मेहनत का काम था। जब लारी चलती होती, तो हममें से तीन-तीन को, बारी-बारी से, उसे सीधा रखना पड़ता। हमारी पताका तूफान के चलते हुए जहाज के मस्तूल जैसी लगती थी। वह बहुत दूर से दिखाई देती होगी। हमने खेतों में काम करने वाले किसानों को विस्मय की मुद्राएं बनाते देखा। स्त्रियां घुटनों के बल होकर क्रॉस का चिन्ह बनातीं।
ज्यों ही हम ऐवेजानो के मार्ग के पहले गांव के पास पहुंचे चालक ने कहा- ‘‘वह गीत गाओ।’’
‘‘कौन सा गीत।’’ हमने पूछा।
‘‘मुझे यह आदेश है कि भीड़ भरे स्थानों से निकलते समय किसानों को गीत गाना चाहिए और अपार उत्साह के लक्षण दिखाना चाहिए।’’
परन्तु हमें कोई गीत नहीं आता था और फिर हमारा सारा ध्यान उस झण्डे को ऊंचा उठाए रखने में लगा था।
मुख्य सडक़ पर हमें किसानों से भरी हुई और ऐवेजानो को जाती हुई बहुत सी लारियां, गाडिय़ां, कारें, मोटर साइकिलें और साइकिलें मिलीं।
हमारे उस बड़े और नीले-सफेद झण्डे को देखकर लोगों को पहले विस्मय होता था और फिर अनन्त हंसी के ठहाके लगते थे। दूसरे लोग जो झण्डे लिए थे काले थे और रूमाल से बड़े नहीं थे, जिनके बीच में मानव खोपड़ी और दोनों ओर हड्डियां चित्रित थीं, जैसी कि तार के खम्भों पर होती है और जिन पर लिखा रहता- ‘‘बहुत खतरनाक।’’
उस झण्डे के कारण ऐवेजानो के प्रवेश द्वार पर तू-तू मैं-मैं हुई। काली कमीजें पहिने हुए नवयुवकों का एक समूह सडक़ के बीच में हमारी प्रतीक्षा करता हुआ खड़ा था। उन लोगों ने यह झण्डा तुरंत उन्हें दे देने के लिए हमसे कहा। हमने मना कर दिया, क्योंकि हमारे पास तो केवल वही था। उन युवकों ने चालक से लारी रोक देने को कहा और जबरदस्ती झण्डा छीनने का प्रयत्न किया। परन्तु मार्ग में हमें जो चिढ़ाया गया था, उससे पर्याप्त शिक्षा मिल गई थी, इसलिए हमने बलपूर्वक उनका विरोध किया और बहुत सी काली कमीजों पर सडक़ की धूल की अच्छी खासी भूरी तह चढ़ गई।
लारी के आसपास उत्तेजित और चिल्लाते हुए लोगों की भीड़ लग गई। बहुत से काली कुर्ती वाले नवयुवक थे, पर दूसरे बहुत से फॉन्टामारा के पास के गांवों के किसान थे, जिन्होंने हमें पहचान लिया और अपनी पूरी आवाज से चिल्ला चिल्ला कर हमारा अभिवादन किया। हम शांति से लारी में ही झण्डे के चारों ओर खड़े रहे, इस दृढ़ निश्चय से कि और अधिक अपमान सहन नहीं करेंगे। यकायक हमें डॉन अब्बैशियो की, पुलिस अधिकारियों से घिरी हुई, हमारी ओर बढ़ती हुई, पसीने से तर, हांफती हुई स्थूल काया, दिखाई दी। हममें से किसी को भी संदेह नहीं था कि एक पादरी के नाते वह संत रोक्को की रक्षा के लिए ही आया होगा। उसने ठीक उल्टा काम किया।
‘‘क्या तुम समझते हो यह कोई कार्निवाल का समय है।’’ वह हम पर चिल्लाया। ‘‘क्या इसी तरीके से धर्म और राज्य के पारस्परिक ऐक्य का निर्वाह करते हो। तुम फॉन्टामारा वाले कब तक इस प्रकार के उपद्रवी ढंग अपनाए रहोगे।’’
बिना एक और शब्द कहे हमने उन काली कुर्ती वाले युवकों को अपना झण्डा लेने दिया। जब एक पादरी ही संत रोक्को को त्याग देता है तो हम ही उसके प्रति क्यों निष्ठावान रहें, वह भी फ्यूसिनो पर अपना अधिकार खोने का खतरा उठाकर।
हमें ऐवेजानो के बाजार में बड़े चौराहे पर ले जाया गया, जहां हमें जननेता के राजभवन के पीछे की छाया में एक अच्छा स्थान दिया गया। किसानों के दूसरे समूह चौराहे के चारों ओर की इमारतों की दीवारों के सहारे दो पंक्तियों में खड़े थे। किसानों के प्रत्येक दल के बीच में पुलिस दल था। पुलिस वाले साइकलों पर चौराहे के चारों ओर इधर-उधर भाग रहे थे। जैसे ही कोई नई लारी आती थी, पुलिस की देखरेख में किसानों को उसमें से उतार कर चौराहे की ओर ऐसे स्थानों पर पहुंचा दिया जाता था,जहां वे किसानों के दूसरे समूहों से बिलकुल अलग हो जाते थे।
एक सुन्दर काले घोड़े पर सवार एक पुलिस अफसर ने चौराहे को पार किया। इसके तुरंत बाद एक पुलिस दूत साइकिल पर बैठकर हर दल को कोई आदेश देने गया हर दल से एक पुलिस वाले ने निकलकर किसानों के प्रत्येक समूह को वह आदेश-पत्र दे दिया। आदेश था- ‘‘तुम बैठ सकते हो।’’
हम जमीन पर बैठ गए। एक घंटे की प्रतीक्षा के बाद एक दूसरे संवाददाता ने बहुत उत्तेजना पैला दी। चौराहे के कोने पर उच्चाधिकारियों का दल आ गया पुलिस वाले ने हमें आज्ञा दी- ‘‘तुरन्त खड़े हो जाओ। खड़े हो जाओ। जोर से चिल्लाओ : पोडेस्टा चिरायु हो। ईमानदार सरकार चिरायु हो! वह सरकार चिरायु हो जो गरीबों को नहीं लूटती।’’
हम खड़े हो गए और पूरी ताकत से चिल्लाये।
‘‘मंत्री महोदय, के लिए यह संभव नहीं था कि वे दस हजार किसानों से बात करते अत: उन्होंने तुम्हारे प्रतिनिधि से बात कर ली।’’ एक अधिकारी ने कहा।
‘‘कौन था हमारा प्रतिनिधि?’’
‘‘माननीय पैलिनो, सेना का आदेशक।’’
‘‘जमीन किस प्रकार बांटी गई है? उसमें से फॉन्टामारा के किसानों को कितनी दी जाएगी? बंटवारा कब होगा?’’ बरार्डो ने पूछा।
‘‘जमीन का बंटवारा नहीं होगा।’’ अधिकारी ने उत्तर दिया। ‘‘मंत्री महोदय और किसानों के प्रतिनिधियों ने तय किया कि छोटे आसामियों को समाप्त कर दिया जाए। उनमें से बहुतों को जमीन इसलिए मिली थी कि वे भूतपूर्व सैनिक हैं; किन्तु युद्धकालीन सेवा कोई सच्चा आर्थिक मापदण्ड नहीं है।’’
‘‘बिलकुल ठीक’’ बरार्डो ने कहा ‘‘युद्ध में चले जाना यह सिद्ध नहीं करता कि तुम्हें भूमि जोतना आता है। महत्वपूर्ण बात है भूमि का उपयोग। फ्यूसिनो उन लोगों का है जो उसे जोतते हैं। यह जॉन सर्कोस्टेंजा का सिद्धान्त है।’’
‘‘मंत्री महोदय ने यह सिद्धान्त स्वीकार कर लिया।’’ अधिकारी ने उत्तर दिया।
‘‘फ्यूसिनो उन लोगों को मिले जो उसे जोतते हैं। फ्यूसिनो उन लोगों को मिले जिनके पास जोतने के साधन हैं और जुतवाने के साधन हैं। दूसरे शब्दों में फ्यूसिनो उन लोगों का है जिनके पास पूंजी है। फ्यूसिनो उन छोटे-छोटे अभागे किसानों से मुक्त किया जाकर धनी क्षत्रपों को दिया जाना चाहिए। जिनके पास पूंजी के बहुत बड़े साधन नहीं है उन्हें फ्यूसिनो की जमीन पट्टे पर लेने का कोई अधिकार नहीं है।’’
‘‘हमारे प्रतिनिधि ने क्या कहा?’’
‘‘माननीय पैलिनो ने किसानों का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि राष्ट्रीय उत्पादन के हित में फ्यूसिनो की पट्टे भूमि के वितरण में से किसानों को निकाल बाहर करना चाहिए। इस उद्दे्श्य की पूर्ति के लिए उन्होंने प्रस्ताव किया कि बड़े-बड़े पट्टेदारों के लगान कम कर देना चाहिए और छोटों के लगान 20 प्रतिशत बढ़ा देना चाहिए। लगान वसूली जिन्स में, विशेषत: चुकन्दर में ही, जिसका मूल्य राजकुमार तोरलोनिया के प्रशासन द्वारा निर्धारित होगा। छोटे-छोटे किसान जो चुकन्दर पैदा नहीं करेंगे वे 700 लायर प्रति हेक्टर चुकाएंगे। मैं यह भी बता दूं कि तुम्हारे प्रतिनिधि के प्रस्ताव ज्यों के त्यों मान लिए गए। किसानों ने भी, जो सारी फ्यूसिनो घाटी से आकर ऐवेजानो में इकट्ठे हुए थे, मंत्री महोदय, सेनानायक और अन्य अधिकारियों का भव्य स्वागत करके अपने संतोष का प्रदर्शन किया। क्या तुम और कुछ जानना चाहते हो?’’
‘‘यह तो बिलकुल साफ है।’’ हमने कहा।
बात वास्तव में बिलकुल स्पष्ट थी। सडक़ें प्रकाश से भरी थीं। इस समय तक काफी देर हो चुकी थी, किन्तु प्रशासन ने रात को दिन बना दिया था।
ऐवेजानो का एक आक्रान्त दृश्य था, उस दुनिया के समान जो पागल होने जा रही हो। मैंने लोगों को कैफे और होटलों में नाचते और बेतुकी मूर्खतापूर्ण बातें, चिल्लाते, आनंद मनाते देखा और मुझे अपने आपको यह विश्वास दिलाने के लिए प्रयत्न करना पड़ा कि जो कुछ हुआ है वह सत्य है यह सब म•ााक है या लोग अनजाने में पागल हो रहेहैं। मैंने अपने आप से पूछा।
‘‘शहर के लोग आनन्द मना रहे हैं, वे सुखी हैं, वे खा-पी रहे हैं। वे यह सब करके किसानों के मुंह पर तमाचा मार रहे हैं।’’ बरार्डो ने कहा।
मदिरा से मस्त युवकों का एक दल हमारे सामने से अश्लील संकेतों के साथ गाता हुआ निकल गया। पहले के बाद दूसरा दल निकला जिसमें काली कुर्ती वाले वे युवक थे जिन्होंने सबेरे हमारे ऐवेजानो आने पर हमसे संत रोक्को का झण्डा छीना था। जैसे ही उन्होंने हमें पहचाना वे चिल्लाने लगे- ‘‘संत रोक्को की जय’’ और इसके बाद उन्होंने अश्लीलताओं की झड़ी लगा दी। तब आपस में हाथ पकडक़र उन्होंने हमें घेर लिया और हमारे चारों ओर नाचने-गाने लगे। उन्होंने जो गाया, वह था-
‘‘मेरी टांगें और तेरी टांगे
कितनी सुन्दर मेहराब बनाएंगी’’
हमने उन्हें ऐसा करने दिया। इसके अतिरिक्त हम क्या कर सकते थे। हम दूसरी ही दुनिया में, शहर के लोगों के बीच थे।
एक भला आदमी हमारे पास आया। हमने देखा कि वह कुछ समय से हमारा पीछा कर रहा था। वह अच्छे कपड़े पहने था, उसके लाल बाल, लाल मूंछें और ठोड़ी पर एक घाव का निशान था।
‘‘तुम लोग फॉन्टामारा के हो?’’ उसने पूछा।
हमने उत्तर नहीं दिया।
‘‘क्या तुम्हें मालूम है कि अधिकारी वर्ग तुमसे भयभीत है? वह कहता गया ‘‘अधिकारी वर्ग जानते हैं कि तुम नई सरकार के विरुद्ध हो।’’ हमने उसे बोलने दिया। ‘‘तुम्हारा पक्ष निस्संदेह सही है’’ वह कहता गया ‘‘तुम उनका विरोध करके बिलकुल ठीक कर रहे हो। यह सब इसी तरह चलता नहीं रह सकता। आओ, हम जरा शांतिपूर्वक और बातें करें।’’
वह एक मोड़ की ओर बढ़ा, हम उसके पीछे-पीछे चले। हम लोगों के पीछे एक नवयुवक चल रहा था, जो शकल-सूरत से एक विद्यार्थी और मजदूर के बीच का प्रतीत होता था। वह कई बार हमारी ओर देखकर मुस्काया, मानो उसे हमसे कुछ कहना हो। वह लाल बाल वाला भद्र पुरुष हमें एक निर्जन कैफे में ले गया और हम उसके पीछे-पीछे उसमें घुसे। वह युवक हमारे पीछे आया, एक पल को ठिठका और तब हमारे पीछे चलकर हमारी मेज के पास ही एक मेज के पास बैठ गया।
‘‘इस तरह नहीं चल सकता। किसानों में असंतोष चरम सीमा पर है। परन्तु तुम अशिक्षित हो। तुम्हें किसी शिक्षित व्यक्ति की आवश्यकता है जो तुम्हारा नेतृत्व करे। डॉन सर्कोस्टेंजा ने मुझे तुम्हारे बारे में बहुत सहानुभूति से सब कुछ बताया है। वह तुम्हारे प्रति शुभकामना रखता है। पर उसे चतुराई से काम लेना पड़ता है, जिससे वह अपने आपको दूसरों की निगाह में गिरा न दे। यदि तुम्हें मेरी आवश्यकता हो, तो मैं तुम्हारी सेवा के लिए प्रस्तुत हूं। यदि तुम्हारी कोई योजना हो तो मेरी सलाह लेना। समझ में आया।’’
उस अपरिचित मनुष्य का तरीका और हमारी सेवा के लिए स्वयं को पूर्णत: प्रस्तुत करना किसी को भी शंकालु बना सकता था, जो हमारी जैसी मानसिक अवस्था में न हो। यह पहला अवसर था जब शहर का एक आदमी हमसे सहानुभूति पूर्ण ढंग से बोला था। हमने उसे बोलने दिया- ‘‘मैं तुम्हारी मानसिक स्थिति समझता हूं’’ उसने कहा। ‘‘तुम्हें समझने के लिए तुम्हारे में झांक लेना पर्याप्त है। पुलिस ने तुम्हें एक घंटे के अंदर ऐवेजानो छोड़ देने के लिए कहा था, पर तुम अभी भी यहां हो। मैं तुम्हारी बात समझता हूं। तुम अधिकारियों के विरुद्ध कुछ करना चाहते हो। यह स्पष्ट है, तुम इसे अस्वीकार नहीं कर सकते। और मैं यहां क्यों हूं? अरे,तुम्हारी सहायता करने, तुम्हें सलाह देने, तुम्हारे साथ अपने आपको बलिदान करने के लिए समझे?’’
हम जरा भी नहीं समझे। पो•िायो पिलानो कुछ कहने ही वाला था कि बरार्डो ने कुहनी से उसे चुप रहने का संकेत किया।
‘‘बहुत अच्छा’’ वह आदमी कहता गया। ‘‘मैं भी सरकार का शत्रु हूं। शायद तुम्हें शस्त्रों की आवश्यकता है। हां तुम अधिकारियों पर एक प्रहार करना चाहते हो, पर साधनों का अभाव है, तुम्हारे पास शस्त्र नहीं है। पर मैं तुमसे कहता हूं, शस्त्र पाना कठिन नहीं है, सरल है, सचमुच बहुत आसान है, दुनिया में इससे सरल कुछ नहीं है।’’
हम अभी तक एक शब्द नहीं बोले थे, पर वह प्रश्न पूछता गया और स्वयं ही उत्तर देता गया।
‘‘तुम कह सकते हो : यह सब सुनने में बड़ा अच्छा लगता है, पर कथनी एक बात है और करनी दूसरी बात। अच्छा, मेरी परीक्षा ले लो। पन्द्रह मिनट इंतजार करो और जो तुम चाहते हो, मैं तुम्हें लाता हूं। इतना ही नहीं मैं तुम्हें उनका प्रयोग भी बता दूंगा। अब भी तुम्हें मेरी बात पर संदेह है। अब भी तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है। अच्छा, यही मेरी प्रतीक्षा करो।’’
वह उठा, हमसे हाथ मिलाये, शराब के आर्डर के पैसे चुकाये और बाहर चला गया।
ज्यों ही वह गया, अगली मेज वाला वह युवक हमारे पास आया और बोला- ‘‘वह पुलिस का एक गुप्तचर है और भडक़ाने वाला है। सावधान रहो। वह तुमको एक बम लाकर देगा और फिर तुम्हें कैद करवा देगा। उसके आने से पहले ही भाग जाओ।’’
हम ऐवेजानो से चल पड़े, खेतों के बीच में से निकलकर सडक़ पर पहुंचे, जिससे वह भडक़ाने वाला दलाल न मिले।
पैदल, भूखे-प्यासे और कटुता से भरे हुए, हम उस सडक़ से लौटे, जिससे सुबह आशा से भरे हुए और सन्त रोक्को का झण्डा हवा में उड़ाते हुए ऐवेजानो के लिए आए थे। हम लगभग अर्धरात्रि में फॉन्टामारा पहुंचे। तीन बजे हम फिर उसी सडक़ पर फ्यूसिनो को जा रहे थे, क्योंकि कटाई शुरू हो गई थी।