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Sunday 19 Nov 2017

झंडा वंदना

 


2सियारामशरण गुप्त

एक हमारा ऊँचा झण्डा, एक हमारा देश।
इस झण्डे के नीचे निश्चित एक अमिट उद्देश्य।।

हमारा एक अमिट उद्देश्य।

देखा जागृति के प्रभात में एक स्वतन्त्र प्रकाश,
फैला है सब ओर एक-सा एक अतुल उल्लास।
कोटि-कोटि कंठों में कूजित एक विजय-विश्वास,
मुक्त पवन में उड़ उठने की एक अमर अभिलाष।
सबका सुहित, सुमंगल सबका, नहीं वैर-विद्वेष,
एक हमारा ऊंचा झण्डा, एक हमारा देश।।

कितने वीरों ने कर कर के प्राणों का बलिदान,
मरते-मरते भी गाया है इस झण्डे का गान।
रक्खेंगे ऊंचे उठ हम भी अक्षय इसकी आन,
चक्खेंगे इसकी छाया में रस-विष एक समान।
एक हमारी सुख-सुविधा है, एक हमारा क्लेश,
एक हमारा ऊंचा झण्डा, एक हमारा देश।।

मातृभूमि की मानवता का जागृत जयजयकार,
फहर उठे ऊँचे से ऊँचा यह अविरोध, उदार।
साहस, अभय और पौरुष का यह सजीव संचार,
लहर उठे जन-जन के मन में सत्य अहिंसा प्यार।
अगणित धाराओं का संगम मिलन-तीर्थ-सन्देश,
ऐ हमारा ऊंचा झण्डा, एक हमारा देश।।
सुने सब-एक हमारा देश।