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Sunday 19 Aug 2018

उतना ही वो उभरेंगे जितना के दबा देंगे



2‘सफी’ (लखनवी)

जिद : हैं अगर जिद  
दुनिया को हिला देंगे ।
मश्रिक1 का सिरा
लेकर मग्रिब2 से मिला देंगे ।।

हम सीन:-ए-हस्ती3
में अंगार: हैं अंगार: ।
शोले भडक़ उठ्ठेंगे,
झोंके जो हवा देंगे।।

मजदूर हों देहकां4
हों हिन्दू हों मुसलमां हों।
सब एक तो हो जाओ
फिर उनको दिखा देंगे।।

हम कौन हैं हम क्या हैं
हम कुछ भी नहींलेकिन।
वक्त आने दो वक्त आने
पर फिर उनको दिखा देंगे।।


मजदूर की फितरत में
कुदरत ने लचक दी है।
उतना हो वो उभरेंगे
जितना के दबा देंगे।।

मजदूर के नालों5
से आतिश6 भडक़ उठ्ठेगी।
चलते हुए पानी में
हम आग लगा देंगे।।

तारीकिए गफलत में हैं
जो के पड़े सोते।
यह नज़्म ‘सफी’
पढक़र हम उनको जगा देंगे।

1. पूरब 2. पश्चिम 3. अस्तित्व 4. किसान 5. चीख-पुकार 6. आग