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Saturday 25 Nov 2017

वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना


2रामप्रसाद ‘बिस्मिल’
रवा1 है बुलबुले शैदा2,
चमन के वास्ते मरना।
वतन के वास्ते जीना,
वतन के वास्ते मरना।।

वतन से दूर क्या परदेस
जाएं हजरते ‘बिस्मिल’।
नहीं बेहतर कहीं दो गज
कफन के वास्ते मरना।।

दीगर3 खाक4 होना है
मुझे खाक़ की हस्ती5 क्या है।
चार दिन बाद बता दूंगा
के मस्ती क्या है।।

वो बुलन्दी पे हैं, आज उनका

सितारा है बुलन्द।
इससे आगाह6
नहीं कुछ भी के पस्ती7 क्या है।।

नेसती8 से उन्हें
आगाह करो ऐ ‘बिस्मिल’।
जो समझते ही नहीं
दिल में के हस्ती क्या है।।

(इंकिलाब जिन्दाबाद की लहर’ उर्फ ‘आजादी का फूल’- प्रकाशक भाई शिव प्रसाद- मुद्रक- फारुखी प्रेस, सहारनपुर)

1. उपयुक्त, 2. चाहने वाली, 3. अन्य 4. धूल, 5. अस्तित्व, 6. जानकार, 7. गिरावट 8.न होना