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Monday 20 Nov 2017

भारत माता


2मैथिलीशरण गुप्त
जय जय भारत माता!
तेरा बाहर भी घर-जैसा रहा प्यार ही पाता।।
ऊँचा हिया हिमालय तेरा,
उसमें कितना दरद भरा।
फिर भी आग दबा कर अपनी,
रखता है वह हमें हरा।
सौ सोतों से फूट-फूटकर पानी टूटा आता।।
जय जय भारत माता!
कमल खिले तेरे पानी में,
धरती पर हैं आम फले।
उस धानी आंचल में आहा,
कितने देश-विदेश पले।
भाई-भाई लड़े भले ही, टूट सका क्या नाता।।
जय जय भारत माता!
तेरी लाल दिशा में ही मां,
चन्द्र-सूर्य चिरकाल उगे।
तेरे आंगन में मोती ही,
हिल-मिल तेरे हंस चुगें।
सुख बढ़ जाता, दुख घट जाता, जब वह है बँट जाता।।
जय जय भारत माता!
तेरे प्यारे बच्चे हम सब,
बन्धन में बहु बार पड़े।
किन्तु मुक्ति के लिए यहां हम,
कहां न जूझे, कब न लड़े।
मरण शान्ति का दाता है, तो जीवन क्रांति-विधाता।।
जय जय भारत माता!