Monthly Magzine
Monday 24 Sep 2018

हिन्दुस्तान


2मौलाना ‘जफर’ अली खां

नाकूस1 से गरज है, न मतलब अजां से है।
मुझको अगर है इश्क तो हिन्दोस्तां से है।।

तेहजीबे2 हिन्द का नहीं चश्म:3 अगर अजल4।
वह मौजे रंग रंग फिर आई कहां से है।।

जर्रे में गर तड़प है तो इस खाके पाक से।
सूरज में रौशनी है तो इस आसमां से है।।

है उसके दम से गर्मिए हंगाम:-ए-जहां5।
मगरिब6 की सारी रौनक इसी इक दुकां से है।।

 1. घण्टा, 2. संस्कृति 3. स्रोत, 4. प्रकृति, 5. सांसारिक उथल-पुथल की गर्मी, 6. पश्चिम
आजादी के तराने (ब्रिटिश राज द्वारा प्रतिबंधित उर्दू साहित्य से) से साभार