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Monday 20 Nov 2017

जोशे जवानी


2‘चकबस्त’ पंडित अजनारायण
हुक्म हाकिम का है $फर्याद जुबानी रुक जाए।
दिल की बहती हुई गंगा की रवानी1 रुक जाए।
कौम कहती है हवा बंद हो, पानी रुक जाए।
पर यह मुमकिन नहीं अब जोशे जवानी रुक जाए।

हों $खबरदार जिन्होंने यह अजीयत2 दी है।
कुछ तमाशा यह नहीं कौम ने करवट ली है।।

हो चुकी $कौम के मातम में बहुत सीन: जनी3।
अब हो इस रंग का सन्यास, है यह दिल में ठनी।
मादरे हिन्द की तस्वीर हो सीने पे बनी।
बेडिय़ां पैर में हों और गले में $क$फनी।

हो यह सूरत से अयां4 आशिके आजादी हैं।
$कुफ्ल5 है जिन की जुबा पर यह वो $फर्यादी हैं।।

आज से शौक़े व$फा का यही जौहर होगा।
$फर्श काटों का हमें फूलों का बिस्तर होगा।
फूल हो जाएगा छाती पे जो पत्थर होगा।
कैद खान: जिसे कहते हैं वही घर होगा।

संतरी देख के उस जोश को शरमाएंगे।
गीत जंजीर की झनकार पे हम गाएंगे।

जिसमें सौदाए मुहब्बत6 था वो सर बा$की है।
रात अंधेरी है मगर यादें सहर7 बाकी है।
दिल के हर जख्म में $फर्याद का दर8 बा$की है।
$कौमे बैदार9 के सीने में जिगर बा$की है।

दिल दहलते नहीं जिन्दा 10 में गिरफ़्तारों के।
बेडिय़ा ढूंढते हैं पांव व$फादारों के।।