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Thursday 23 Nov 2017

वन्दना के इन स्वरों में


2 सोहनलाल द्विवेदी
वंदना के इन स्वरों में,
एक स्वर मेरा मिला लो।
बंदिनी मां को न भूलो।
राग में जब मत्त झूलो।।
अर्चना के रत्न कण में,
एक कण मेरा मिला लो।
जब हृदय का तार बोले।
श्रृंखला के बन्द खोले।।
हो जहां बलि शीश अगणित,
एक सिर मेरा मिला लो।