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Wednesday 22 Nov 2017

एकता गीत


2माधव शुक्ल
मेरी जां न रहे मेरा सर न रहे,
सामां न रहे न ये साज रहे
फकत हिन्द मेरा आजाद रहे
मेरी माता के सर पर ताज रहे
सिख, हिन्दू, मुसलमां एक रहें,
भाई-भाई सा रस्म रिवाज रहे,
गुरु-ग्रन्थ कुरान-पुरान रहे,
मेरी पूजा रहे औ नमाज रहे।
मेरी टूटी मड़ैया में राज रहे,
कोई गैर न दस्तन्दाज रहे।
मेरी बीन के तार मिले हों सभी,
इक भीनी मधुर आवाज रहे।

ये किसान मेरे खुशहाल रहें,
पूरी हो फसल सुख-साज रहे।
मेरे बच्चे वतन पै निसार रहें,
मेरी मां बहिनों की लाज रहे।
मेरी गायें रहें, मेरे बैल रहें,
घर घर में भरा सब नाज रहे।
घी-दूध की नदियां बहती रहें,
हरसू आनन्द स्वराज रहे।
माधो की चाह खुदा की कसम,
मेरे बादे वफ़ात ये बाज रहे।
खादी का कफन हो मुझ पै पड़ा,
‘वन्दे मातरम्’ अलफाज रहे।