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Monday 20 Nov 2017

अप्रैल अंक आद्यान्त पढ़ा। प्रस्तावना बेहद पसंद आई। फिल्मों पर ललित सुरजन के विचारों से अभिभूत हुए बिना नहीं रहा जा सकता।

डॉ. बी. कार,  मो.9425844990
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अप्रैल अंक आद्यान्त पढ़ा। प्रस्तावना बेहद पसंद आई। फिल्मों पर ललित सुरजन के विचारों से अभिभूत हुए बिना नहीं रहा जा सकता। नीरजा के चरित्र में वीरता व कर्तव्यपरायणता हमें सबक सिखाती है। सभी कहानियां रोचक है। इस अंक की सबसे अच्छी बांग्ला कहानी हमारी बातें लगी। दिलीप कुमार शर्मा ने मूल कहानी का बहुत अच्छा अनुवाद किया है, रामनाथ राय द्वारा लिखित मूल कहानी को मैंने पढ़ा है। अनूदित कहानी भी वही आनन्द प्रदान करती है। प्रेम की डोर संभालने वाली खैनी समकालीन कथा को उजागर करती गणेशचन्द्र राही की कविता अस्सी चुटकी नब्बे ताल सर्वाधिक पसंद आई, कवि को बधाई, साधुवाद।     वर्धा शब्दकोश से महेन्द्र राजा जैन ने पर्दा हटाकर हम पाठकों का ज्ञानवद्र्धन किया है। अब तो इस शब्दकोश को पढऩा ही होगा। मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि इतने प्रकाण्ड विद्वानों से ऐसी गल्तियाँ कैसे हो गयी? शुक्रगुजार हूँ, जैन साहब की जिन्होंने अत्यंत बारीकी से कोश की छानबीन की। महेन्द्र राजा जैन से मैं सहमत हूँ कि कुल तिहत्तर विद्वानों ने मात्र ड़ेढ दो वर्षों में इस बहुमूल्य कोश को तैयार करके दुनिया में रिकार्ड कायम किया है। शब्दकोश तैयार करना हर किसी के बूते की बात नहीं होती। अप्रैल के इस अंक को संभालकर रखा है, जो अक्षर पर्व नहीं पढ़ते या जिन्हें प्राप्त नहीं होती, उन्हें पढऩे का अवसर देना चाहती हूँ। कुछ लोगों को इस पृष्ठ की फोटोकापी भी भेजी है।