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Tuesday 21 Nov 2017

घर

 मार्टिन जॉन
वाकई घर का आउटलुक काबिले-तारीफ था। डिजाइन ऐसा कि राह चलते कोई भी एक पल ठहर कर नजर डालने को मजबूर हो जाए। वह मुझे बड़े प्यार से घर के अंदर ले गया। घर के अंदर का दृश्य देखकर मैं दंग रह गया। अत्याधुनिक लग्जरी सामान, अभिभूत कर देने वाले इंटीरियर डेकोरेशन से पूरा घर चमक दमक रहा था। मेरा हाथ पकड़ कर मेरा मित्र घर का चप्पा-चप्पा घुमाते हुए घर बनाने की प्रक्रिया और घर में रखी कीमती वस्तुओं के बारे में बताते जा रहा था। घर का ग्राउंड फ्लोर घूम लेने के बाद हम दोनों सोफे में धंस गए।
   वाकई, तुमने बड़ा ही शानदार घर बनाया है ! तारीफ सुनकर उसका चेहरा खुशी से खिल उठा। लेकिन, भाभीजी कहीं दिखाई नहीं दे रही हैं?
मेरी इस जिज्ञासा से उसका दमकता चेहरा एकबारगी बुझ सा गया। एक लंबी सांस लेकर उसने मायूस स्वर में कहा , छ महीने से बोलचाल बंद है। फस्र्ट फ्लोर के अपने कमरे में हैं।
   और बेटा बहू?
उसने अपनी ललाट पर हाथ फिराया और मुझसे वगैर नजर मिलाये रुक रुक कर टुकड़ों में जवाब दिया- बहू नहीं है घर पर। मायके चली गई है। दो महीने हो गए। पति, सास से लडक़र ! स्वर बुझा बुझा सा था।
घर के लोगों के बारे में कोई और सवाल कर मैं उसे ज्यादा दुखी नहीं करना चाहता था। तसल्ली के दो शब्द बोलकर माहौल को थोड़ा हल्का किया। सब ठीक हो जाएगा दोस्त, धैर्य रखो !
खाक ठीक हो जाएगा यार ! छोटकी बहू ने भी तो छोटू को तलाक देकर दूसरी शादी कर ली है। क्या-क्या सुनाऊं तुझे। उसकी आवाज भर्रायी हुई थी। रुआंसा चेहरा साफ दिख रहा था।
मेरी बोलती बंद हो गई। ज्यादा देर तक मैं उसके घर में बैठ नहीं पाया। इजाज़त लेकर वापसी के लिए भारी मन से अपने घर के लिए रवाना हो गया।
जब अपना घर पहुंचा तो देखा, बगीचे में ही कुर्सियां डाल कर पत्नी, बहू बेटे और बच्चे इक_े शाम की चाय का आनंद ले रहे थे। मुझे देखते ही बच्चे मुझसे लिपट गए। पत्नी ने मुस्कराते हुए कहा- देख आये अपने दोस्त का महल? कैसा है महल देखने में?
मैं कुछ पल रुका, अपने घर और परिवार के सदस्यों को प्यार भरी नजरों से  देखते हुए कहा- अपने घर से छोटा !
अपर बनियासोल, पोस्ट आद्रा, जिला पुरुलिया, पश्चिम बंगाल 723121