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Friday 17 Nov 2017

गिरना

 

ज्योति देशमुख
स्कालर्स एकेडमी
जयश्री नगर, देवास
मो. 9926810581
गिरना
गिरने को तो गिरता है
आंसू भी आंख से
पत्ता भी शाख से
पकने पर गिरता है आम
और थोड़ा छेटी रख कर कबीट

पर्वत की चोटी से गिरता है
एवलांच और जल प्रपात भी

गिरती है ओस
गिरती है धूप
गिरते हैं उल्कापिंड
और टूटे तारे भी

गिरता है बाजार भाव
सेंसेक्स भी

गिरते हैं साम्राज्य
गिरती  हैं सरकारें
गिरती है गा
गिरती है साख

लेकिन कोई नहीं गिरता वैसे
जैसे गिरता है आदमी।

गुहार

वो क्षण जो तुम्हारे हाथों से
छूट गया था चलते-चलते
वो क्षण वहीं पर ठहर गया
अधर में कहीं अटक गया

सोचा थोड़ा सा धकेल कर
उसको आगे को सरका दूं
आने वाले क्षण के लिए
थोड़ी सी जगह बना दूं
आने वाला क्षण शायद
साथ तुम्हें भी ले आए

कितने बरसों के क्षण
इस क्षण को बिताने में लगा दिए
टस से मस भी हुआ नहीं
ये क्षण सब क्षणों पे भारी है

जीवन पर्वत की चोटी पर
चट्टान के जैसे टिका हुआ
लुढक़ जाएगा क्षण भर में
क्षण जो बरसों से रुका हुआ
आकर तुम जो बस
थोड़ा सा हाथ लगाओगे।


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