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Sunday 19 Nov 2017

मार्च अंक के उपसंहार में मकबूल शाइर निदा फाज़़ली की शाइरी पर सर्वमित्रा जी के तथ्यपरक, तर्कपूर्ण उद्धरण, शाइर की मकबूलियत को दो बाला करते हैं।

मधुर नज्मी, गोहना, मुहम्मदाबाद
मार्च अंक के उपसंहार में मकबूल शाइर निदा फाज़़ली की शाइरी पर सर्वमित्रा जी के तथ्यपरक, तर्कपूर्ण उद्धरण, शाइर की मकबूलियत को दो बाला करते हैं। निदा साहब आम आदमी के शाइर थे। उनकी अस्मिता को प्रणाम।