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Wednesday 18 Jul 2018

अक्षरपर्व फरवरी अंक कई अंकों में विशिष्ट लगा। ललित सुरजन जी की प्रस्तावना और श्याम सुंदर दास की हिंदी शब्द सागर के प्रथम संस्करण की भूमिका अच्छी लगी।

 

रामनिहाल गुंजन, नया शीतल टोला, आरा, बिहार
अक्षरपर्व फरवरी अंक कई अंकों में विशिष्ट लगा। ललित सुरजन जी की प्रस्तावना और श्याम सुंदर दास की हिंदी शब्द सागर के प्रथम संस्करण की भूमिका अच्छी लगी। इनके अलावा महेंद्र राजा जैन का उसने कहा था के प्रकाशन के सौ वर्ष पर आलेख, नौरत सिंह मीणा का हिंदी उपन्यास और आदिवासियों का जीवन पर लेख तथा रायप्रवीण पर पं.गुणसागर सत्यार्थी का आलेख खास तौर पर अच्छे लगे। अप्रैल अंक में नवल जायसवाल का मेघ की व्यंजना शीर्षक आलेख, सारंग उपाध्याय का कवि-गीतकार प्रेमशंकर रघुवंशी के संबंध में संस्मरण और डा. शिबन कृष्ण रैना की आलोचक जीवन सिंह से बातचीत खासतौर पर पसंद आई।