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Wednesday 22 Nov 2017

धर्म का सार मानवता का उत्थान है


मोतीलाल

बिजली लोको शेड, बंडामुंडा, राउरकेला  770032
मो. 09931346271


उ.1 धर्मतत्ववाद में मूल रूप से जो तत्व हैं वो हमेशा से हमें हमारे नैतिक मूल्यों को मजूबत करते हुए हमें मानवता की सीख देते हैं और हमारे जीवन को कैसे बेहतर बनाये इसकी ओर हमें उन्मुख करते हैं जबकि आतंकवाद मानवता के प्रचंड विरोध में धर्म की ऊँगली पकड़ कर हमें और हमारे समाज को जहाँ संकीर्ण करता है वहीं भय का माहौल बनाकर जबरदस्ती संकीर्ण धर्म थोपना चाहता है।
उ.2    मूल रूप से वैश्विक राजनीति और आतंकवाद का रिश्ता अवसरवाद के तराजू में फलता-फूलता दिखता है। यहाँ यह देखना होगा कि अपनी राजनीति चमकाने के लिए वे आतंकवाद का सहारा लेते हैं और उनकी आड़ में अपने स्वार्थ की पूर्ति में लग जाते हैं। इस तरह गन्दी राजनीति का सहारा पाकर आतंकवाद अपने मुकाम पर बढ़ता चला जाता है।
उ.3   वाम राजनीति में धर्म और इससे जुड़ी अन्य गतिविधि को अधिक महत्व नहीं देकर सिर्फ  वंचितों के लिए काम करना अपने कदमों को छोटा करना है। उदार मानवीय रूप का जो आकार होता है उसमें सभी दृष्टिकोण से देखने की जरुरत के साथ ही उसे अधिक से अधिक मजबूत करने की भी जरुरत होती है। यही गलती वाम राजनीति को हाशिये पर धकेल दे रही है।
उ.4   दरअसल सभी धार्मिक ग्रन्थ हमें और हमारे समाज को सही दिशा दिखाते हंै और नैतिकता की राह पर चलने को कहते हंै, किन्तु इसके विपरीत कट्टरपंथी विचार उन धार्मिक ग्रंथों की आड़ में अपना उल्लू सीधा करने की ताक में रहते हैं और यहीं हमें तोडऩे की कोशिश की जाती है और अपनी-अपनी श्रेष्ठता साबित करने हेतु कई-कई भ्रम फैला कर सभी धर्मों के बीच वैमनस्य पैदा किए जाते हैं। हमें खुली नजर से इन कट्टरवादियों की चाल को देखना चाहिए और खुले मन से विचार कर हमें उन रास्तों पर चलना चाहिए जहाँ एकता और मानवता की राह प्रशस्त हो।
उ.5  धर्म का सार मानवता का उत्थान है यदि कोई भी उपाय इसके विरुद्ध हो रहा हो तो हमें समझना चाहिए कि दाल में कुछ काला है। परंपरा के नाम पर मानवाधिकार को दबाया नहीं जा सकता। गहरी समझ के साथ इस चाल को हमें समझना चाहिए और हमें रुढि़वादी न बनकर हमेशा उदारवादी बने रहना चाहिए।
उ.6  पूरी दुनिया में साम्राज्यवाद की तूती बोलती है। धर्म की आड़ में आतंकवाद को समर्थन देकर उन जगहों को हड़पना है और प्राकृतिक संसाधनों को लूटना है, इसी कूटनीति के तहत पूरे दुनिया में यह आतंकवाद जारी है। हमें अपनी समझ को और ज्यादा मजबूत बनाते हुए इस चाल के विरुद्ध सशक्त होकर अपनी आवाज बुलंद करना होगा। सच्चे मीडिया को साथ लेकर और समाज के बीच जाना होगा और उन आतंकवादियों को मानवता की मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयत्न करना होगा।
उ.7    बंदूक से बंदूक को कभी भी नहीं दबाया जा सकता है। आतंकवाद का खात्मा आतंकवाद के भीतर जो कुविचार हैं उसे ठीक से पहचान कर और उनके भीतर मानवता का बीज रोप कर ही उन्हें मुख्यधारा में लाया जा सकता है।
 उ.8  असहिष्णुता, असहमति और विचारों के युद्ध में एक बात जो सिरे से खारिज कर दी जाती है, वह है आदमी की अपनी अस्मिता और इनके बीच से निकलने वाले वो सारे सवाल, जिनका उत्तर सिर्फ  और सिर्फ  एक बड़े फलक में मानवीय दृष्टिकोण के भीतर ही खोजा जा सकता है। इसके बाहर हम जितना भी हाथ-पांव मार लें, एक ठोस समाधान नहीं मिल सकता है।
उ.9  आज की राजनीति, बिना सुविचारों के नाव पर बैठी है जिनका संतुलन कहीं से दिखता नजर नहीं आता है। यदि आतंकवाद के रास्ते से उनका कोई हित पूरा होता हो तो वे उन रास्तों को चमकाने में लग जाते है। लोगों की सेवा करने वाली राजनीति अब बीते समय की बात हो गयी है।
उ.10  वर्तमान में समाज और देश की चिंता बिना आदर्शवाद के पतवार के बीच फंसी वह नाव हो गयी है जिसे सही दिशा में खेना बहुत मुश्किल सा लगता है, बावजूद इसके विवेकशील मनुष्यों को आगे बढऩा होगा और इसके समाधान में अपना योगदान देना ही होगा।