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Tuesday 21 Nov 2017

आज के समय में विद्यार्थी आंदोलन

प्रगतिशील लेखक संघ और भारतीय जन नाट्य संघ की अशोकनगर इकाई के संयुक्त कार्यक्रम में ‘‘आज के समय में विद्यार्थी आंदोलन’’ विषय पर विचार-विमर्श का आयोजन 4 अप्रेल 2016, को प्रगतिशील लेखक संघ और इप्टा की अशोकनगर, म. प्र. इकाई ने किया। बैठक के मुख्य वक्ता प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव विनीत तिवारी ने विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि राजनीति में विद्यार्थी आंदोलनों का बहुत अधिक महत्व है। विद्यार्थी नौजवानों का आंदोलन नई उर्जा से भरा हुआ होता है और वे दुनिया की तमाम विद्रूपताओं को, सच को झूठ को अपने इर्द-गिर्द देखते हैं। कभी उनसे घृणा करते हैं कभी उनसे छले जाते हैं। लेकिन यही वो संक्रमणकाल होता है जिसमें वो अतीत और वर्तमान के बारे में अपनी समझ कायम करते हैं। पिछली लगभग आाधी सदी में उभरे विद्यार्थी आंदोलनों का ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी आंदोलन वर्ग चेतना के साथ जुड़े तब उन्होंने पूंजीवाद के खिलाफ लड़ाई में ज्यादा लंबी और अहम भूमिका निभाई। वर्ग दृष्टि ना होने के नतीजे के तौर पर अनेक विद्यार्थी आंदोलनों को पूंजीवाद ने हजम कर लिया। उन्होंने कहा कि इस दौर के आंदोलन में वाम ताकतें और दलित ताकतें नजदीक आई हैं। वर्गीय समझ के आधार पर बना जोड़ इस वक़्त के विद्यार्थी आंदोलन के लिए बड़ी उपलब्धि है और इसे मजबूत करते रहना चाहिए। विनीत ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए छात्र आंदोलनों का उदाहरण दिया और उनका उद्देश्य भी बताया। जेएनयू और कन्हैया प्रकरण पर उन्होंने कहा कि अॅाक्यूपाई यूजीसी से धीरे-धीरे जेएनयू के विद्यार्थियों ने अपने संघर्ष को पूरे देश के विद्यार्थियों का संघर्ष बनाया। जब वे फेलोशिप की लड़ाई लड़ रहे थे तब भी उनकी नजर में शिक्षा पर होने वाला अंतरराष्ट्रीय पूंजीवादी हमला साफ था।