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Saturday 18 Nov 2017

भारतीय जन लेखक संघ का प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन

 भारतीय जन लेखक संघ का प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन 10 जनवरी 16 को गांधी शांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली में डॉ. सोहनपाल सुमनाक्षर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में भारतीय जन लेखक संघ के राष्ट्रीय संयोजक महेन्द्र नारायण पंकज ने दिवंगत साहित्यकारों, समाजसेवियों, राजनेताओं, रंगकर्मियों के प्रति शोक प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज देश में लेखकों, समाजसेवियों की हत्या होना चिन्ता की बात है। लेखकों पर साम्प्रदायिक हमले को रोकने के लिए साहित्य में सवर्णवादी वर्चस्व को तोडऩा होगा। सम्मेलन में आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए युद्धरत आम आदमी (मासिक) पत्रिका नई दिल्ली के कार्यकारी सम्पादक पंकज चौधरी ने कहा कि समानता और सामाजिक न्याय के लिए साहित्य में ब्राह्मणवादी एकाधिकार को समाप्त करना होगा। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अंतरराष्ट्रीय जन लेखक संघ के उपाध्यक्ष एचबी विश्वा (भूटान) ने कहा कि आज पूरी दुनिया में हालात संकटपूर्ण है। ऐसी स्थिति में हम लेखकों को दुनिया को बचाने के लिए आगे आना होगा। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए राजस्थान की प्रोफेसर डॉ.शमा खान ने कहा कि हमें जनहित में लेखन नहीं बल्कि उनके लिए जो शोषित, पीडि़त हैं कार्य करना चाहिए। तभी जनता में जागरूकता आयेगी और बदहाली दूर हो सकती है। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता अरुण कुमार मंडल ने कहा कि आज देश मेें जो समस्याएं हैं चाहे गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, विषमता आदि की है इसमें साहित्यकारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है। उत्तराखंड के प्रोफेसर डॉ. राजेश पाल ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बदलाव का साधन भी है। कमला नेहरु कॉलेज, दिल्ली की प्राध्यापिका डॉ.अनुराधा गुप्ता ने कहा कि आज के हालात में हमें जनता के बीच जाना होगा। तीर्थराम तोनगरिया,  कृष्ण कुसुमपाल, कर्मवीर बौद्ध, डॉ.पूरन सिंह, इंजीनियर विषु देव बौद्ध, प्रतिभा माही, शोभाराम चक्रवर्ती, कन्हैया लाल परिहार, श्यामलाल माचला ने भी अपने विचार व्यक्त किये। सम्मेलन के द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें कई राज्यों के कवियों ने भाग लिया। इस अवसर पर महेन्द्र नारायण पंकज द्वारा लिखित क्रांतिवीर चन्द्रशेखर आजाद प्रबंध काव्य एवं नागमणि लिखित अंग्रेजी उपन्यास द ड्रीम गर्ल का लोकार्पण किया गया। सम्मेलन के अंतिम सत्र में 35 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य समिति का गठन किया गया। इसमें सर्वसम्मति से उत्तराखंड के प्रो.डॉ.राजेश पाल को राष्ट्र्रीय अध्यक्ष एवं त्रिपुरा के कृष्ण कुसुमपाल, लखनऊ के विष्णु देव बौद्ध, डॉ.लालती देवी उत्तर प्रदेश, राजस्थान के कन्हैया लाल परिहार, दालाभाई राव नई दिल्ली की डॉ.अनुराधा गुप्ता, बिहार के डॉ.ध्रुव कुमार उपाध्यक्ष, बिहार के राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत कथाकार महेन्द्र नारायण पंकज को राष्ट्रीय महासचिव निर्वाचित किया गया। राष्ट्रीय सचिव पद के लिए उमेश पंडित उत्पल बिहार, डॉ. शमा खान, राजस्थान, तीर्थराम तोनगरिया, पंजाब अमित मनोज, हरियाणा, मांगेराम मोरथला, हरियाणा का चयन किया गया। कोषाध्यक्ष के पद पर डॉ.गजेन्द्र कुमार बिहार, उपकोषाध्यक्ष के पद पर सुभाषचन्द्र प्रभाकर बिहार का निर्वाचन किया गया।
राष्ट्रीय महासचिव महेन्द्र नारायण पंकज ने यह जानकारी दी।