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Tuesday 12 Nov 2019

कोंपलें इन में

जयप्रकाश श्रीवास्तव
आई सी 5 सैनिक सोसाइटी
शक्तिनगर जबलपुर 482001
मो. 7869193927
कोंपलें इन में

ठूंठ से सपने
जाने कब उगेंगी
कोंपलें इनमें
हो रही है
दर्द की तफ़सील
घूमती है
धुरी पर तहसील
जिले भर का
हो गया भुगतान
कागजी जन में
जंगलों में
आग की दहशत
दरख्तों से
पत्तियां रुख़सत
शाख़ पर बैठे
परिंदों की जुबां
घुट गई मन में
खेतों के सब
कंठ हैं अवरुद्ध
नियति के संग
लड़ रहे हैं युद्ध  
श्रम को बो कर
उगाते हैं भूख
खेतिहर उनमें

सिसकते रह गए सपने

सड़कों पर
धूप पिघलती  
सिसकते रह गए सपने

मौन साधे
दिन गुजरता है
आंख से
आंसू बरसता है
घुटन में
बस हाथ बांधे
जोड़ कर बैठे हैं टखने

धरा भी
उच्छवास पर जीती
बीज से
है कोख तक रीती
जड़ों में
मासूम हलचल
भूख भी है लगी डसने

तोड़कर
उम्मीद का दर्पन
कर रहे
बस नियति का दर्शन
हो गई
पहचान सबकी
हैं पराये कौन अपने