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Wednesday 22 Nov 2017

न्याग्रा का जलनृत्य

 

अशोक भाटिया
1882, सेक्टर.13, करनाल 132001
मो.9416152100
न्याग्रा का जलनृत्य

धरती को
इस काबिल मान लिया गया
कि न्याग्रा के झरने
बहें यहाँ अनवरत
ढाई सौ फुट की ऊँचाई से
सौ फुट चौड़ी घनी धार
लगातार
बनाती इन्द्रधनुष

पानी का बहाव
प्रपात का सिंगार करता
नशा सा घुलता
धुंधले रंग का पानी
भूरे सुनहरे
दानेदार पानी में बदलता

पानी की धार
भेज रही कुदरत लगातार
अंग्रेज युवतियों के
खूबसूरत बालों की लटें बनाकर
एक और छोटा सा झरना है
दुल्हन के घूंघट सा
न्याग्रा के झरने
सूखा खत्म करने का
बीड़ा उठाए भागे आते हैं
साथ लेकर आते हैं
हर बुराई धोने का अमृत संकल्प
पानी के पीछे का पानी
सौन्दर्य बिखेरने को बेताब है
आगे वाले पानी से पहले
छलांग मारकर प्रपात बनने को
लोगों की आँखों में
झरने झर रहे लगातार
पत्थरों के रंग बदल गए
सौन्दर्य भोगकर
बत्तखें सुबह-शाम हैरान हैं
डुबकियाँ लगाता पानी
उठाता जोरदार शोर
जिसके साथ उठती
आकाशगामी धुंध
इन्सान की
सौन्दर्य जानने की सीमा बताती
झरने की कुछ खूबसूरती छिपाती
सौन्दर्य भाग्यशाली है
इन झरनों में आ बैठा है
तो और भी चमक उठा है
उदार बनाने की कला
जानता है
न्याग्रा का जल नृत्य
न देखने की कोई रुकावट
न खुलेपन में कोई बनावट
गति और सौन्दर्य
मूर्तिमान होकर
एकमेक हो गए हैं
मस्तिष्क
न्याग्रा की धार के पैरों पड़ रहा है
भावना धार के साथ छलक मार
आंखों तक पहुंच रही है
झरने खुश हैं, उदार हैं
मस्त हैं, लगातार हैं
साथ हैं, सबके लिए हैं
भरपूर हैं, पूरमपूर हैं
खुश करने की
भावुक करने की
रोमांच भरने की
इतनी ताकत उसमें कहाँ से आई
भला कौन जानता है !